सवाई माधोपुर, 5 नवंबर।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन सवाई माधोपुर जिले की ग्राम पंचायत बरनाला में यह प्रयास अब उपेक्षा की धूल में दब गए हैं। कभी स्वच्छता का प्रतीक रही पंचायत की डस्टबिनें अब खुद गंदगी और लापरवाही की मिसाल बन गई हैं।

ग्राम पंचायत बरनाला द्वारा गांव के विभिन्न स्थानों पर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से कई डस्टबिनें लगाई गई थीं। प्रारंभ में इनसे ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब कचरा सड़क और गलियों में नहीं फैलेगा, परंतु कुछ ही महीनों में स्थिति उलट गई। गांव के अधिकांश डस्टबिन अब सड़क किनारे उल्टे पड़े धूल फांक रहे हैं, कुछ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि कई के बारे में चर्चा है कि वे कबाड़ में बेच दिए गए हैं।

स्थानीय निवासी राजेन्द्र बरनाला ने बताया कि ग्राम पंचायत ने इन डस्टबिनों की खरीद पर हजारों रुपये खर्च किए थे, परंतु उनका कभी भी सही तरीके से उपयोग नहीं हुआ। न तो इनके रखरखाव की कोई योजना बनाई गई और न ही नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, स्वच्छता अभियान का उद्देश्य अधूरा रह गया और ये डस्टबिन अब उपेक्षा की प्रतीक बन चुकी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और निगरानी की कमी से सरकारी योजनाओं की साख पर प्रश्नचिह्न लग गया है। सार्वजनिक धन से खरीदी गई ये सुविधाएं यदि उपयोग से पहले ही नष्ट हो जाएं, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता है बल्कि जनहित की योजनाओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी भी दर्शाती है।

अब सवाल यह उठता है कि जब स्वच्छता अभियान जैसी प्राथमिक योजनाएं भी लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं, तो ग्राम स्तर पर स्वच्छता का सपना कब साकार होगा? ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनता के पैसे की ऐसी बर्बादी न हो।

Pratahkal Bureau

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