बिना अनुमति पेड़ों की कटाई पर रोक, जिला कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को कार्रवाई का दिया भरोसा।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के विरोध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए एडवोकेट मुकेश भूप्रेमी, रत्नाकर गोयल और अन्य जागरूक नागरिक।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
- कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जब मौके पर जाकर पेड़ कटाई से संबंधित आदेश, स्वीकृति, सड़क की चौड़ाई तथा अन्य तकनीकी जानकारियों के बारे में पूछा गया, तो किसी भी अधिकारी द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
- पेड़ कटाई के दौरान लोगों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी नहीं किए गए हैं।
- कटे हुए पेड़ों की लकड़ी कहां ले जाई जा रही है, इसकी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
व्यापक स्तर पर कटाई और सरकारी विरोधाभास
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि बजरिया के अलावा सिविल लाइन, मंडी रोड, ट्रक यूनियन सहित अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार हर वर्ष वृक्षारोपण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से मौजूद पूर्ण विकसित पेड़ों को बिना ठोस कारण काटा जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नागरिक
- एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश भूप्रेमी
- व्यापारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता रत्नाकर गोयल
- पार्षद राजेश पहाड़िया
- सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश शर्मा
- अनवर खान, पंकज शर्मा, राधेश्याम सोनी सहित कई जागरूक नागरिक
जिला कलेक्टर का आश्वासन
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि बिना वैधानिक अनुमति किसी भी पेड़ की कटाई नहीं होने दी जाएगी और पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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