सवाई माधोपुर, 4 नवंबर।

खण्डार क्षेत्र के कुशालीदर्रा शहीद स्मारक पर गुर्जर समाज में वर्षों से लंबित मूर्तियों की स्थापना का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष दीपक सिंह गुर्जर ने यहां एक भावनात्मक घोषणा करते हुए कहा कि जब तक कुशालीदर्रा पर कर्नल किरोरी सिंह बैसला और दो वीर शहीदों की मूर्तियां नहीं लग जातीं, तब तक वे अपने सिर पर साफा या पगड़ी नहीं बांधेंगे।

दीपक सिंह ने कहा कि यह साफा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज के “आन, बान और शान” का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह पगड़ी हमारे सम्मान की निशानी भी है और जिम्मेदारी का प्रतीक भी। जब हमारे समाज के स्वाभिमान पर आंच आए, तो इस सम्मान को धारण करना व्यर्थ है।”

गुर्जर समाज लंबे समय से कुशालीदर्रा में कर्नल बैसला और दो शहीदों की मूर्तियां लगाने की मांग कर रहा है, किंतु वन विभाग की अनुमति में आ रही बाधाओं के चलते यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका। समाज में इस देरी को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। दीपक सिंह ने कहा कि अब यह संघर्ष केवल प्रतीकों का नहीं, बल्कि समाज के गौरव और अस्तित्व की रक्षा का प्रश्न बन चुका है।

उन्होंने पूरे देश के गुर्जर समाज से 14 नवंबर को कुशालीदर्रा पहुंचकर इस आंदोलन को मजबूती देने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र भाटी स्वयं 200 से अधिक वाहनों के काफिले के साथ कुशालीदर्रा पहुंचकर इस संकल्प को समर्थन देंगे।

दीपक सिंह ने कहा कि जब तक समाज के वीरों की मूर्तियां स्थापित नहीं होतीं, तब तक उनका यह संकल्प कायम रहेगा। उनके इस संकल्प ने न केवल गुर्जर समाज में नई ऊर्जा भर दी है, बल्कि इस संघर्ष को एक प्रतीकात्मक आंदोलन में भी बदल दिया है — एक ऐसा आंदोलन, जो सम्मान, स्वाभिमान और एकता की भावना से प्रेरित है।

Pratahkal Bureau

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