संवत्सरी पर हिण्डौन में 52 श्रावक-श्राविकाओं ने धारण किया पौषध, ‘मिच्छामि दुक्कड़म’ से मांगी क्षमा
संवत्सरी पर हिण्डौन में 52 श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध धारण किया। सामूहिक प्रतिक्रमण के बाद ‘मिच्छामि दुक्कड़म’ से क्षमापना की।

तस्वीर में संवत्सरी महापर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में बैठे हुए श्रद्धालु दिख रहे हैं।
पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस जैन समाज ने संवत्सरी महापर्व श्रद्धा, तप, संयम और आत्मावलोकन के साथ मनाया। वर्षभर में मन, वचन और कर्म से जाने-अनजाने हुई भूलों और अपराधों का आत्मचिंतन करते हुए समाजबंधुओं ने प्रतिक्रमण किया तथा एक-दूसरे से क्षमायाचना कर मैत्री और सद्भाव का संदेश दिया। दिनभर धार्मिक आयोजनों के चलते वातावरण भक्तिमय बना रहा।
संवत्सरी जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिवस नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मनिरीक्षण और क्षमापना का पर्व है। पर्युषण के दौरान साधक अपने जीवन, व्यवहार और विचारों का अवलोकन करते हुए चिंतन करता है कि वर्षभर में उसके द्वारा मन, वचन और कर्म से किसी जीव को जाने-अनजाने कष्ट तो नहीं पहुंचा। संवत्सरी इसी आत्ममंथन को क्षमा के भाव तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करती है।
संवत्सरी के अवसर पर समाज के 52 बालक, पुरुष एवं महिलाओं ने पूर्ण दिवस पौषध धारण कर संयम और साधना का पालन किया। पौषध के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं ने सांसारिक गतिविधियों से स्वयं को दूर रखते हुए धार्मिक आराधना, स्वाध्याय, ध्यान एवं आत्मचिंतन में समय व्यतीत किया। पौषध धारण करने वाले साधकों में पूरे दिन धर्म के प्रति विशेष उत्साह दिखाई दिया।
जैन परंपरा में पौषध को आत्मसंयम और साधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इसका उद्देश्य केवल उपवास या आहार का त्याग करना नहीं, बल्कि मन को भी सांसारिक विषयों से हटाकर आत्मा की ओर उन्मुख करना है। संवत्सरी के दिन पौषध धारण कर समाजबंधुओं ने इसी भावना को आत्मसात करने का प्रयास किया।
दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत भगवान की वार्षिक पूजाओं की बोलियां लगाई गईं। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक बोली में भाग लेकर विभिन्न धार्मिक लाभ प्राप्त किए। परमात्मा की स्नात्र पूजा के पश्चात माला की बोली लगाई गई। श्री जैन श्वेतांबर पल्लीवाल मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट (नई मण्डी मोहन नगर, हिण्डौन) में माला की बोली 305555 रुपए में श्री बाबूलाल लाल जी प्रदीप जी दिवरया ने लिया। वहीं वर्धमान नगर में कपूर चंद राहुल जैन दीपक जैन हेमन्त जैन शेरपुर वालों ने 221121 रुपए में माला पहनाने का लाभ लिया।
धार्मिक लाभ लेने के लिए समाजबंधुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के माध्यम से भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए आत्मकल्याण एवं धर्म आराधना की भावना को मजबूत किया।
सायंकाल संवत्सरी का सामूहिक प्रतिक्रमण आयोजित किया गया। समाजबंधुओं ने एक साथ प्रतिक्रमण करते हुए वर्षभर में मन, वचन और कर्म से हुई भूलों का स्मरण किया तथा आत्मनिरीक्षण किया। प्रतिक्रमण के दौरान अपने व्यवहार में हुई त्रुटियों को स्वीकार करते हुए भविष्य में उनकी पुनरावृत्ति नहीं करने का संकल्प लेने की भावना दिखाई दी।
जैन दर्शन में प्रतिक्रमण को आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर झांककर विचार करता है कि उसके आचरण से किसी जीव को कष्ट, हिंसा या मनोवेदना तो नहीं हुई। संवत्सरी का प्रतिक्रमण इसी आत्मचिंतन को व्यवहार में उतारने का अवसर देता है।
प्रतिक्रमण के पश्चात समाजबंधुओं ने एक-दूसरे से “मिच्छामि दुक्कड़म” कहते हुए वर्षभर में हुई गलतियों एवं मन-मुटाव के लिए क्षमायाचना की। इस अवसर पर छोटा-बड़ा, अपना-पराया और किसी प्रकार का भेदभाव न रखते हुए सभी ने परस्पर क्षमा मांगने और क्षमा करने की भावना व्यक्त की।
संवत्सरी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि क्षमा केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि मन से द्वेष और कटुता को समाप्त करने का माध्यम बने। किसी के प्रति मन में राग, द्वेष अथवा वैमनस्य हो तो उसे समाप्त कर संबंधों में पुनः मधुरता लाना ही क्षमापना की वास्तविक भावना है।
जैन धर्म में क्षमापना को आत्मा की निर्मलता से जोड़ा गया है। ‘मिच्छामि दुक्कड़म’ के माध्यम से व्यक्ति अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगता है और दूसरों की भूलों को क्षमा करने का भाव भी रखता है। यही भावना समाज में मैत्री, प्रेम, सौहार्द और आपसी एकता को मजबूत करती है।
संवत्सरी व्यक्ति को अपने बीते हुए वर्ष का आत्मावलोकन करने और आने वाले समय के लिए जीवन को अधिक संयमित एवं सद्भावपूर्ण बनाने का संकल्प लेने का अवसर देती है। मन में किसी के प्रति द्वेष न रहे, वाणी से किसी को ठेस न पहुंचे और कर्मों से किसी जीव को कष्ट न हो, यही इस पर्व की मूल भावना है।
पर्युषण महापर्व के दौरान की गई तपस्या, आराधना और धार्मिक साधना का सार भी अंततः आत्मशुद्धि और क्षमाभाव में निहित है। संवत्सरी के अवसर पर समाजबंधुओं ने परस्पर क्षमा मांगते हुए वर्षभर की कटु स्मृतियों को पीछे छोड़कर प्रेम, सद्भाव और मैत्री के साथ नई शुरुआत का संदेश दिया।
इस प्रकार पर्युषण महापर्व का समापन केवल धार्मिक आयोजनों के साथ नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, क्षमा और परस्पर सद्भाव की भावना के साथ हुआ।

Dheerajkumar Sharma(Sawai Madhopur )
नाम: धीरज कुमार शर्मा
वर्तमान पद: हिंडौन संवाददाता (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: हिंडौन सिटी, जिला करौली (राजस्थान)
बीट: स्थानीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, कला और धार्मिक गतिविधियां
परिचय
धीरज कुमार शर्मा राजस्थान के करौली जिले के अंतर्गत आने वाले हिंडौन सिटी क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह हिंडौन के स्थानीय समाचारों के साथ-साथ विशेष रूप से राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र को नियमित रूप से कवर करते हैं। इसके अलावा, कला और धार्मिक विषयों पर भी उनकी अच्छी पकड़ है और वह इन क्षेत्रों में भी रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
धीरज कुमार शर्मा को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 साल का लंबा अनुभव है:
- वह पिछले तीन वर्ष से लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और हिंडौन क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।
- 'प्रातः काल' से पहले उन्होंने 10 साल तक 'राष्ट्रदूत' अखबार में कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduation) की डिग्री प्राप्त की है।
