नगर परिषद चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद हिण्डौन की स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर दिखाई दे रहा है। भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशियों ने कई वार्डों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए प्रमुख दलों के सियासी समीकरणों को प्रभावित किया है। चुनाव परिणाम के बाद सामने आए दावों के अनुसार 60 में से 39 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों का परचम रहा है। ऐसे में नगर परिषद में बोर्ड बनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

चुनाव से पहले भाजपा में टिकट वितरण को लेकर सामने आई नाराजगी का असर परिणामों में भी दिखाई दिया। अशोक पाठक गुट से जुड़े समर्थकों के टिकट कटने के बाद बड़ी संख्या में नाराज लोग निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें से कई प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने ही चुनौती खड़ी कर दी। इससे भाजपा के पुराने सियासी समीकरणों को झटका लगा है।

सबसे चर्चित मुकाबलों में वार्ड 31 का परिणाम रहा। यहां भाजपा ने राजेश्वरी गुर्जर को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी वंदना सिंघल ने उन्हें शिकस्त देकर चुनाव जीत लिया। राजेश्वरी गुर्जर को सभापति पद के संभावित दावेदारों में भी माना जा रहा था। ऐसे में उनकी हार से भाजपा के भीतर सभापति पद को लेकर बनाए जा रहे समीकरणों को बड़ा झटका माना जा रहा है।

60 सदस्यीय नगर परिषद में निर्दलीय पार्षदों की बड़ी संख्या के कारण अब बोर्ड गठन में उनकी भूमिका निर्णायक हो गई है। चुनाव परिणाम के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 39 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत बताई जा रही है। यदि यह आंकड़ा अंतिम रूप से सही रहता है तो भाजपा और कांग्रेस के लिए बहुमत का रास्ता निर्दलीयों के समर्थन के बिना आसान नहीं होगा।

सूत्रों के अनुसार निर्दलीय पार्षदों ने भी अपनी ताकत को समझते हुए नेतृत्व के सामने शर्तें रखना शुरू कर दिया है। भाजपा की ओर से निर्दलीय पार्षदों को साधने और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशों के बीच निर्दलीयों का एक बड़ा धड़ा अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है।

वहीं, सभापति पद को लेकर भी नया सियासी समीकरण सामने आया है। विजय कुमारी चतुर्वेदी के पक्ष में 42 पार्षदों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में उनके निर्विरोध सभापति बनने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति आधिकारिक प्रक्रिया और सभी आवश्यक औपचारिकताओं के बाद ही स्पष्ट होगी।

भाजपा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकृत पार्षदों के साथ निर्दलीय विजेताओं को अपने साथ लाने की है। दूसरी ओर निर्दलीय पार्षदों की संख्या अधिक होने से वे बोर्ड गठन में अपनी भूमिका और हिस्सेदारी को लेकर मजबूत स्थिति में हैं। चुनाव परिणाम ने यह संकेत दिया है कि इस बार हिण्डौन नगर परिषद में पार्टी के बजाय निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विधानसभा चुनाव में 60 हजार मतों से पराजित प्रत्याशी को संगठन और सत्ता में कमजोर करने की मांग को लेकर निर्दलीय खेमा भी सक्रिय बताया जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में हिण्डौन की स्थानीय राजनीति में नए शक्ति केंद्र उभरने के संकेत मिल रहे हैं।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

नाम: हरक चंद जैन

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)

परिचय

हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
  • अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।

Next Story