भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच बेजुबान पक्षियों को राहत देने के उद्देश्य से हिंडौन सिटी के निकटवर्ती ग्राम करई में एक सराहनीय और अनूठी मानवीय पहल की शुरुआत हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पेन्द्र गारूवाल ने पर्यावरण संरक्षण और जीव दया का अनुपम उदाहरण पेश करते हुए कचरे में फेंके जाने वाले नारियल के खोल से पक्षियों के लिए प्राकृतिक और ठंडे घोंसलों का निर्माण किया है।

पुष्पेन्द्र गारूवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक आयोजनों और व्यावसायिक उपयोग के बाद अक्सर नारियल के खोल को व्यर्थ समझकर फेंक दिया जाता है। उन्होंने इन खोलों को एकत्रित कर उन्हें रचनात्मक तरीके से तराशा और पक्षियों के अनुकूल सुरक्षित आशियानों का रूप प्रदान किया। इन निर्मित घोंसलों को क्षेत्र के विभिन्न पेड़ों पर सुनियोजित तरीके से स्थापित किया जा रहा है, ताकि चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच पक्षियों को न केवल गर्मी से निजात मिल सके, बल्कि उन्हें रहने के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक निवास भी प्राप्त हो।

यह पहल दोहरे उद्देश्य को सिद्ध कर रही है; एक ओर जहाँ यह पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर 'वेस्ट टू बेस्ट' यानी कचरे से उपयोगी वस्तु बनाने की प्रेरणा भी दे रही है। गारूवाल का यह नवाचार वर्तमान में समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जिसकी स्थानीय निवासियों द्वारा मुक्त कंठ से सराहना की जा रही है। उल्लेखनीय है कि पुष्पेन्द्र गारूवाल द्वारा संपूर्ण जिले में पहले से ही पक्षियों की प्यास बुझाने हेतु 'परिंडे लगाओ अभियान' वृहद स्तर पर चलाया जा रहा है। जीव सेवा के प्रति समर्पित उनका यह प्रयास अब एक जन-आंदोलन का रूप ले रहा है।

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