हिंडौन: कर्तव्य की अनूठी मिसाल, कड़कड़ाती ठंड में शिक्षक ने अपने खर्च पर संवारा 180 नौनिहालों का भविष्य
हिंडौन के बमनपुरा गाँव में शिक्षक शुभम शेरवाल ने नववर्ष पर पेश की मानवता की मिसाल। कड़कड़ाती ठंड में 180 विद्यार्थियों को जूते व गर्म कपड़े वितरित कर शिक्षा के प्रति अपने अटूट समर्पण को दर्शाया। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दयाल सिंह सोलंकी की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षक की भूमिका को समाज सेवा और कर्तव्य के नए आयाम दिए। जानिए कैसे एक शिक्षक बदल रहा है गाँव की तस्वीर।

हिंडौन (करौली)। वर्तमान दौर में जहाँ शिक्षा को प्रायः एक औपचारिक दायित्व या केवल आजीविका का साधन माना जाने लगा है, वहीं राजस्थान के हिंडौन क्षेत्र से मानवता और समर्पण की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो शिक्षक शब्द की गरिमा को नई ऊँचाइयों पर ले जाती है। बमनपुरा गाँव के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक शुभम शेरवाल ने नववर्ष के अवसर पर न केवल खुशियाँ बांटी, बल्कि समाज के सामने 'कर्तव्य बोध' का एक जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
नववर्ष की पहली किरण के साथ जब लोग उत्सवों में डूबे थे, तब शिक्षक शुभम शेरवाल ने अपने विद्यालय के लगभग 180 विद्यार्थियों के लिए एक विशेष स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को गर्म कपड़े और जूते वितरित किए, ताकि अभावों की शीत लहर इन बच्चों की शिक्षा की राह में बाधा न बन सके। यह पहल महज सामग्री का वितरण नहीं थी, बल्कि उन नन्हे हाथों को थामने का एक प्रयास था जो कल देश का भविष्य बनेंगे। शुभम शेरवाल की निष्ठा यहीं तक सीमित नहीं है; वे राजकीय अवकाश और छुट्टियों के दिनों में भी नियमित रूप से विद्यालय आकर बच्चों को पढ़ाते हैं, जो यह सिद्ध करता है कि एक सच्चा शिक्षक घड़ी की सुइयों से नहीं बल्कि विद्यार्थियों की प्रगति और अपनी संवेदनाओं से निर्देशित होता है।
इस गरिमामयी अवसर पर शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों सहित प्रबुद्ध जन साक्षी बने। कार्यक्रम में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्रीमान दयाल सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ ही सेवानिवृत्त अध्यापक विजय सिंह, गिरदावर कोमल चौधरी, अध्यापक पिंटू चौधरी और पवन बैनीवाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दयाल सिंह सोलंकी ने शिक्षक की इस निस्वार्थ सेवा की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि शुभम शेरवाल जैसे शिक्षक पूरे शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यदि एक शिक्षक संकल्प ले ले, तो वह न केवल बच्चों का भविष्य संवारता है, बल्कि पूरे समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का सामर्थ्य रखता है।
शुभम शेरवाल केवल कक्षा के भीतर ही सक्रिय नहीं हैं, बल्कि वे निरंतर ग्रामवासियों की बैठकें बुलाकर अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक भी करते रहते हैं। उनका मानना है कि जब तक समुदाय शिक्षा से नहीं जुड़ेगा, तब तक पूर्ण परिवर्तन संभव नहीं है। वास्तव में, 'एक शिक्षक ऐसा भी' की यह गाथा हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सेवा और संस्कारों के मेल से ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य फलीभूत होता है। इस पहल ने बमनपुरा गाँव के प्रत्येक घर में यह संदेश पहुँचाया है कि शिक्षक केवल ज्ञान का प्रदाता ही नहीं, बल्कि समाज का सजग रक्षक भी होता है।

Pratahkal Bureau
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