हिंडौन सिटी। शिव कॉलोनी के हेमंत धाकड़ ने इंजीनियरिंग सेवा (IES) परीक्षा में पहली ही कोशिश में 73वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि संघर्ष और मेहनत की मिसाल भी कायम की। वर्तमान में वे हिमाचल प्रदेश में एनएचपीसी में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं।

हेमंत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद आईआईटी कानपुर से बीटेक की डिग्री प्राप्त की। उनकी सफलता की कहानी केवल अकादमिक योग्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन संघर्ष और चुनौतियों को पार करने की क्षमता का भी प्रतीक है। वर्ष 2010 में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी माताजी, शारदा देवी, पर आ गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण में कोई कमी नहीं छोड़ी।

हेमंत ने परिवार की आर्थिक चुनौतियों और विषम परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई में लगातार उत्कृष्टता दिखाई। वे अपने परिवार में एकमात्र भाई हैं और उनकी पांच बहनें हैं, जिनमें से दो वर्तमान में सरकारी शिक्षिका हैं, जबकि बाकी पढ़ाई में सक्रिय हैं। चार बहनों की शादी हो चुकी है। हेमंत का कहना है कि उनकी सफलता में सबसे बड़ा योगदान उनकी माताजी और बड़े जीजाजी का रहा, जिन्होंने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया।

इस सफलता ने न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत को मान्यता दी है, बल्कि यह अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है कि कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। हेमंत धाकड़ की यह उपलब्धि स्थानीय और राज्य स्तर पर प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

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Pratahkal Bureau

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