डॉ. सुमीत गर्ग ने दी हीट स्ट्रोक और लू से बचाव की चिकित्सकीय सलाह
सवाई माधोपुर के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुमीत गर्ग ने भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन और लू के लक्षणों के प्रति सचेत करते हुए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।

सवाई माधोपुर में गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य सावधानियों की जानकारी देते वरिष्ठ फिजीशियन और एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया राजस्थान के वाइस चेयरमैन डॉ. सुमीत गर्ग।
प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान, तेज धूप और गर्म हवाओं ने आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। सवाई माधोपुर के वरिष्ठ फिजीशियन एवं गर्ग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक तथा एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ़ इंडिया राजस्थान के वाइस चेयरमैन डॉ. सुमीत गर्ग ने चेतावनी दी है कि गर्मी का यह दौर केवल असहजता नहीं, बल्कि कई बार जानलेवा स्थिति भी पैदा कर सकता है।
डॉ. सुमीत गर्ग के अनुसार, वर्तमान समय में भीषण गर्मी के कारण शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ रहा है, जिससे शरीर की ताप नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। लगातार पसीना आने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी हो जाती है, जिसके चलते डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से सामने आ रही है। इसके प्रमुख लक्षणों में अत्यधिक प्यास, मुंह सूखना, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और पेशाब कम आना शामिल हैं। समय पर पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति नहीं होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में सबसे गंभीर स्थिति लू लगना यानी हीट स्ट्रोक है। जब शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक हो जाता है और शरीर स्वयं को ठंडा नहीं कर पाता, तब यह स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे मामलों में तेज बुखार, घबराहट, उल्टी, चक्कर, भ्रम, बेहोशी और दौरे तक पड़ सकते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तत्काल चिकित्सकीय उपचार आवश्यक है।
डॉ. गर्ग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दस्त, उल्टी, पेट दर्द और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं। खुले में रखे खाद्य पदार्थों और सड़क किनारे अस्वच्छ पेय पदार्थों का सेवन संक्रमण को बढ़ावा देता है। इसके साथ ही अत्यधिक पसीने और नमी के कारण घमौरियाँ, फंगल इंफेक्शन और एलर्जी जैसी त्वचा संबंधी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ तथा हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीज इस मौसम में अधिक संवेदनशील होते हैं और विशेष सतर्कता की आवश्यकता है। बचाव के लिए दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना चाहिए, भले ही प्यास न लगे। नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ORS जैसे पेय शरीर में पानी और लवणों की कमी को पूरा करने में सहायक हैं।
डॉ. गर्ग ने दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढककर निकलें। हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर को ठंडक मिल सके। खान-पान में ताजे फल, सलाद और हल्का भोजन शामिल करना चाहिए। तरबूज, खरबूजा, खीरा और मौसमी फल शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में सहायक हैं, जबकि बासी, तले-भुने और खुले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों और बुजुर्गों को बंद कमरों या वाहनों में अकेला न छोड़ा जाए। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, बेहोशी, सांस लेने में कठिनाई, लगातार उल्टी-दस्त या मानसिक भ्रम जैसी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
डॉ. सुमीत गर्ग ने अंत में कहा कि गर्मी का मौसम सावधानी और संयम का समय है। थोड़ी जागरूकता और सही दिनचर्या अपनाकर लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव संभव है। बचाव ही सबसे प्रभावी उपचार है।

Pratahkal Bureau
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