सवाई माधोपुर, 1 जुलाई। राज्य सरकार द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर किसानों के लिए कृषि विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का एक अत्यंत प्रभावी और सशक्त माध्यम सिद्ध हो रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से किसानों को योजनाओं की विस्तृत जानकारी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एक ही स्थान पर सुलभ कराया जा रहा है। इसका ज्वलंत और उत्कृष्ट उदाहरण ग्राम जैतपुर, ग्राम पंचायत खेड़ा बाढ़ (रामगढ़) की महिला कृषक मोहरबाई पत्नी गंगाराम बैरवा हैं, जिन्हें कृषि विभाग के कुशल मार्गदर्शन से 'खेत तलाई' (फार्म पौण्ड) योजना के अंतर्गत 1.35 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है।

कृषि पर्यवेक्षक लोकेश चौधरी एवं सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू लाल मीना ने मोहरबाई को खेत तलाई योजना की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना वर्षा जल संरक्षण, सिंचाई की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के सक्रिय मार्गदर्शन में मोहरबाई ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया और पात्रता की समस्त शर्तें पूर्ण होने पर उन्हें प्लास्टिक लाइनिंग युक्त खेत तलाई के निर्माण हेतु 1,35,000 रुपये का अनुदान स्वीकृत कर दिया गया।

मोहरबाई ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पूर्व में वर्षा का अधिकांश जल खेत से व्यर्थ बह जाता था, जिसके कारण फसल सिंचाई हेतु उन्हें अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ता था। अब खेत तलाई के निर्माण से वर्षा का जल सुरक्षित रूप से सिंचाई हेतु संरक्षित होगा, जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होगा। इससे न केवल आवश्यकता के समय सिंचाई की सुविधा मिलेगी, बल्कि भू-जल का पुनर्भरण होगा और मिट्टी में नमी का स्तर लंबे समय तक बना रहेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में वे इसी फार्म पौण्ड का उपयोग मछली पालन एवं बत्तख पालन जैसे अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने में भी करेंगी।

कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी ने योजना के विस्तृत आयामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि खेत तलाई का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण कर किसानों को सिंचाई का स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराना तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमांत कृषकों को प्लास्टिक लाइनिंग युक्त फार्म पौण्ड पर लागत का 90 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1.35 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है, जबकि अन्य श्रेणी के किसानों को लागत का 80 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1.20 लाख रुपये का अनुदान देय है। इसी प्रकार, कच्चे फार्म पौण्ड पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमांत कृषकों को लागत का 70 प्रतिशत अथवा अधिकतम 73 हजार 500 रुपये तथा अन्य श्रेणी के किसानों को लागत का 60 प्रतिशत अथवा अधिकतम 63 हजार रुपये तक का अनुदान प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध है।

योजना के तहत 400 से 1200 घनमीटर क्षमता तक की खेत तलाई पर अनुदान देय है। पात्र किसान, जिनके पास एक स्थान पर न्यूनतम 0.30 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, वे राज किसान साथी पोर्टल अथवा निकटतम ई-मित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन हेतु ट्रेस नक्शा, जनआधार कार्ड एवं छह माह से अधिक पुरानी न होने वाली जमाबंदी की प्रति तथा खसरे का नक्शा ट्रेस सहित आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होते हैं।

महिला कृषक मोहरबाई ने राज्य सरकार एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें विभागीय अधिकारियों का समय पर सहयोग नहीं मिलता, तो वे इस महत्वपूर्ण योजना से वंचित रह जातीं। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी आह्वान किया कि वे ग्रामीण सेवा शिविरों में बढ़-चढ़कर भाग लें और कृषि विभाग की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ करें। मोहरबाई की यह सफलता इस तथ्य का प्रमाण है कि ग्रामीण सेवा शिविर महज योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये शिविर पात्र किसानों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाकर जल संरक्षण, सिंचाई सुदृढ़ीकरण और कृषि उत्पादकता में वृद्धि की दिशा में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

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