सवाई माधोपुर, 18 मई। कृषि विज्ञान केंद्र सवाई माधोपुर द्वारा शुक्रवार को 'ग्राम कृषि महोत्सव' के अंतर्गत उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर एक वृहद् जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने की, जबकि बॉम (BOM) के सदस्य बद्री लाल शर्मा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। आधुनिक कृषि पद्धतियों के दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए और किसानों को समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ यह महोत्सव क्षेत्र के नीतिगत कृषि सुधारों में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने कृषकों को संतुलित उर्वरक उपयोग तथा रासायनिक खेती के गंभीर दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया। उन्होंने पुरातन कृषि पद्धति, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती एवं यौगिक खेती को अपनाने पर विशेष बल देते हुए जागरूक किया। उन्होंने अत्यंत भावुक व प्रभावी लहजे में कहा कि धरती हमारी माता है और माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारा परम कर्तव्य है; जब धरती माता स्वस्थ रहेगी, तभी हमारा परिवार भी पूर्णतः स्वस्थ रहेगा। निरंतर घटते कृषि भूमि के आकार पर चिंता व्यक्त करते हुए कुलगुरु ने कृषकों को आह्वान किया कि वे अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर 'मल्टीलेयर खेती' की ओर कदम आगे बढ़ाएं, जिससे उन्हें सीमित भूमि से भी निरंतर और अधिक आय प्राप्त हो सके।

इसी क्रम में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेंद्र सिंह ने कृषि तकनीकी पक्षों को साझा करते हुए बताया कि संतुलित उर्वरकों के सटीक उपयोग के लिए कृषकों को केवल यूरिया एवं डीएपी पर निर्भरता छोड़नी होगी। मृदा की उर्वरा क्षमता को दीर्घकालिक तौर पर बढ़ाने हेतु जैविक खाद, जैव उर्वरक तथा हरी खाद आदि को नियमित कृषि पद्धतियों में अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। निदेशक अनुसंधान डॉ. एमसी जैन ने कृषकों को जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में वर्तमान में हो रहे उन्नत अनुसंधानों की प्रामाणिक जानकारियां दीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के तहत जैविक खाद, जैव उर्वरक, हरी खाद एवं दलहनी फसलों को मुख्य धारा में शामिल कर खेती की लागत को काफी हद तक कम किया जा सकता है और अपनी वार्षिक आय में आशातीत वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

तकनीकी सत्रों में कृषि महाविद्यालय कोटा के डॉ. रामराज मीना ने उपस्थित कृषकों को बागवानी में समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के गुर सिखाए तथा उद्यानिकी फसलों में संतुलित उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की विस्तृत जानकारी साझा की। वहीं, केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. बीएल मीना ने उर्वरकों के सटीक व संतुलित उपयोग के प्रति कृषकों को जागरूक करते हुए हानिकारक रसायनों के विकल्प के तौर पर जैविक कीटनाशकों के प्रभावी प्रयोग के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस महोत्सव के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाले प्रगतिशील कृषकों को मंच से पुरस्कृत व सम्मानित भी किया गया। प्रतियोगितात्मक आकलनों में अवधेश मीना ने प्रथम स्थान प्राप्त कर पुरस्कार जीता। इसके साथ ही जिले में जैविक खेती को नया आयाम देने वाले अग्रणी कृषक बत्तीलाल मीना, जानकीलाल मीना तथा समेकित कृषि प्रणाली को सफलता से अपनाने वाले अग्रणी कृषक बजरंग सिंह राजावत को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंचासीन विशिष्ट महानुभावों द्वारा केंद्र द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए सूचनाप्रद फोल्डरों— “उर्वरकों के संतुलित प्रयोग”, “मसूर की उन्नत खेती” एवं “उड़द की वैज्ञानिक खेती” का विधिवत विमोचन किया गया, जो आगामी समय में कृषकों के लिए मार्गदर्शिका का कार्य करेंगे।

इस वृहद् महोत्सव का कुशल मंच संचालन डॉ. नूपुर शर्मा ने किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के सहायक निदेशक डॉ. खेमराज मीना, केंद्र के समस्त वैज्ञानिकगण, जिले के नामचीन अग्रणी कृषक सहित कुल 500 से अधिक कृषकों एवं कृषक महिलाओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। यह कार्यक्रम सवाई माधोपुर क्षेत्र में रसायनों से मुक्त, लागत-न्यूनतम और प्रकृति-अनुकूल कृषि क्रांति के सूत्रपात का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

Pratahkal Newsroom

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