सिरोही स्थित अल्पसंख्यक मामलात विभाग के कार्यक्रम अधिकारी रमेश चौधरी ने 31 जुलाई 2026 को जारी प्रेस नोट में “जेन जी- लोकतंत्र और भारत का भविष्य” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान को केवल विधि का दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया था। उन्होंने उल्लेख किया कि आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी सबसे बड़ी शक्ति केवल नियमित चुनाव और सरकार परिवर्तन नहीं, बल्कि जनसामान्य की सक्रिय भागीदारी है, जो संविधान की प्रस्तावना “हम भारत के लोग” में निहित है। उनके अनुसार लोकतंत्र की पूर्णता केवल विधान मंडल तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण में आमजन की भागीदारी तथा मौलिक अधिकारों की वास्तविक अनुभूति से ही संभव है।

प्रेस नोट में कहा गया है कि 21वीं सदी का भारत ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां जेन जी (जनरेशन जेड) स्वतंत्र भारत की पहली ऐसी पीढ़ी है जिसने इंटरनेट, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एआई आधारित एप्लीकेशन्स को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया है। सूचना से समृद्ध यह पीढ़ी सवाल उठाती है और जवाबदेही की अपेक्षा करती है, जो इसे भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की सबसे बड़ी आशा बनाती है। इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए उस विचार का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि राजनीतिक लोकतंत्र को सामाजिक और आर्थिक न्याय का आधार नहीं मिला तो लोकतंत्र की आत्मा कमजोर पड़ सकती है। साथ ही उनके इस कथन को भी उद्धृत किया गया है कि संविधान की सफलता अंततः उसे संचालित करने वाले नागरिकों और संस्थाओं पर निर्भर करेगी।

रमेश चौधरी ने लिखा है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन इस बात का प्रमाण है कि युवा और छात्र केवल किसी राष्ट्र का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के परिवर्तनकारी नेतृत्व भी होते हैं। स्वतंत्रता के बाद भी छात्र आंदोलनों ने लोकतंत्र को नई दिशा प्रदान की। गुजरात का नव निर्माण आंदोलन, बिहार का छात्र आंदोलन, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतांत्रिक पुनर्जागरण, मंडल आयोग और शिक्षा सुधार से जुड़े आंदोलन, भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना आंदोलन तथा वर्तमान डिजिटल युग का कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन समय-समय पर सरकारों को आमजन की अपेक्षाओं के प्रति संवेदनशील बनाने और सुधार के लिए विवश करने वाले उदाहरण बताए गए हैं। इस संदर्भ में भगत सिंह का कथन “क्रांति की तलवार विचारों की शान पर तेज होती है” भी उल्लेखित किया गया है।

प्रेस नोट में कहा गया है कि लोकतंत्र में जन आंदोलन या असहमति कोई कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है, बशर्ते वह संवैधानिक दायरों में रहते हुए सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का समर्थन करे। इसमें महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा आधारित लोकतांत्रिक संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्होंने सिद्ध किया था कि जनमत, नैतिक बल और शांतिपूर्ण प्रतिरोध किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।

लेख में पंजाबी कवि पाश की प्रसिद्ध पंक्तियों “सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना” का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वर्तमान संक्रमण काल में यह पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। इसमें कहा गया है कि आज की युवा पीढ़ी शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और अवसरों की समानता जैसे विषयों पर पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक मुखर है और त्वरित समाधान की अपेक्षा रखती है। कुछ विद्वानों द्वारा डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीप फेक तथा वास्तविक जनहित और छद्म एजेंडा के बीच की बारीक रेखा को देखते हुए जेन जी को लोकतंत्र और जनमत निर्माण के लिए संदेह की दृष्टि से देखने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, प्रेस नोट के अनुसार हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के सफल आंदोलन ने यह सिद्ध किया है कि जेन जी केवल मीम्स तक सीमित नहीं है, बल्कि अहिंसक, धैर्यवान, तकनीकी रूप से दक्ष और रोचक तरीकों से जनमत निर्माण की समर्थक है। साथ ही यह भी कहा गया है कि तीव्र संचार प्रणाली उपलब्ध होने के कारण इस पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी की तरह आसानी से भ्रमित नहीं किया जा सकता।

प्रेस नोट में वर्तमान की जेन जी और पुरानी पीढ़ी के बीच समस्या समाधान के तरीकों में अंतर का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि जहां पुरानी पीढ़ी संगठन, व्यक्तिगत संपर्क और दीर्घकालिक सामाजिक आंदोलनों पर अधिक विश्वास करती थी, वहीं जेन जी डिजिटल माध्यम से जनमत निर्माण की शक्ति पर भरोसा करती है। दोनों दृष्टिकोणों की अपनी उपयोगिता बताते हुए कहा गया है कि अनुभव और नवाचार का समन्वय ही लोकतंत्र को स्थायी मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत का लोकतांत्रिक भविष्य किसी एक दल, विचारधारा या सरकार से नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और जागरूक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से निर्मित होगा।

रमेश चौधरी ने कहा है कि आज जेन जी के सामने अवसर भी अभूतपूर्व हैं और चुनौतियां भी। यदि यह पीढ़ी संवैधानिक दायरों में रहकर सत्य, अहिंसा, विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ती है तो निश्चित रूप से विश्व को लोकतंत्र का एक नया मॉडल प्रदान करेगी।

प्रेस नोट के अंत में उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है और इसकी रक्षा किसी दल, सरकार, न्यायालय या संसद से पहले जागरूक नागरिक करते हैं। उनके अनुसार आज का भारत ऐसे जागरूक नागरिक की प्रतीक्षा नहीं कर रहा, बल्कि जेन जी के रूप में उसे अपने सामने खड़ा देख रहा है और यही विश्वास भारत के उज्ज्वल, समावेशी और लोकतांत्रिक भविष्य की सबसे बड़ी आशा है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

नाम: हरक चंद जैन

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)

परिचय

हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
  • अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।

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