गौशालाओं में बीमार गायों का एंटीबायोटिक युक्त दूध बेचने का आरोप
जिला मुख्यालय की गौशालाओं में बीमार गायों का केमिकल व एंटीबायोटिक युक्त दूध स्वस्थ गायों के दूध में मिलाकर बाजार में सप्लाई करने का आरोप लगा है।

जिला मुख्यालय की गौशाला में पशुओं के चारे और रखरखाव की व्यवस्था देखते लोग; यहां बीमार गायों का केमिकल युक्त दूध बेचने के आरोपों के बाद जांच की मांग उठी है।
गौमाता की सेवा के नाम पर लाखों रुपये का दान लेने वाली जिला मुख्यालय की गौशालाओं में दूध मिलावट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बीमार और इलाजरत गायों का एंटीबायोटिक तथा दूध बढ़ाने वाले केमिकल युक्त पाउडर मिला दूध स्वस्थ गायों के दूध में मिलाकर आमजन को बेचा जा रहा है। मामले को नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा खतरा माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार गौशालाओं में हजारों गोवंश के संरक्षण के लिए प्रतिदिन दानदाता हरा चारा और पोषक आहार उपलब्ध कराते हैं। पशु चिकित्सकों की नियमित सेवाएं भी दी जाती हैं, लेकिन मुनाफाखोरी के चलते बीमार गायों का दूध अलग रखने के बजाय सीधे स्वस्थ गायों के दूध में मिलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन गायों का उपचार एंटीबायोटिक इंजेक्शन और दूध उत्पादन बढ़ाने वाले केमिकल युक्त पाउडर से किया जा रहा है, उनका दूध भी बाजार में सप्लाई किया जा रहा है।
चिकित्सकों की सलाह पर नवजात शिशुओं को गाय का दूध पिलाने वाले परिवार अनजाने में एंटीबायोटिक और केमिकल युक्त दूध बच्चों को पिला रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा दूध नवजातों के लीवर, किडनी और इम्युनिटी सिस्टम पर गंभीर असर डाल सकता है। एंटीबायोटिक युक्त दूध के सेवन से बच्चों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, एलर्जी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जबकि केमिकल मिश्रित दूध हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकता है।
मामले में खाद्य सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं। FSSAI Act 2006 के तहत बीमार पशु का दूध बेचना अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें छह माह तक की जेल और पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। IPC की धारा 272 के तहत मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने पर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले Oxytocin इंजेक्शन पर केंद्र सरकार पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है।
मामले को लेकर जिला कलेक्टर और CMHO से गौशालाओं के दूध के सैंपल लेकर लैब जांच कराने, बीमार और स्वस्थ गायों का दूध अलग-अलग रखने के आदेश जारी करने, एंटीबायोटिक उपचार वाली गायों का दूध 15 दिन तक बिक्री से रोकने और दोषी गौशाला प्रबंधकों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
गौमाता की सेवा और शुद्ध दूध के नाम पर सामने आया यह मामला अब आमजन के स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और नवजात बच्चों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है।

Pratahkal Bureau
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