गंगापुर सिटी: 'राम राज्य' के संकल्प के साथ ग्रामीण भारत का कायाकल्प, बेढम ने कांग्रेस के 'नाम के मोह' पर बोला तीखा हमला
गंगापुर सिटी में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने 'वीबी जी राम जी' विधेयक के जरिए ग्रामीण भारत के पुनरुत्थान का रोडमैप पेश किया। उन्होंने कांग्रेस पर योजनाओं के नामकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नया कानून 2047 के विकसित भारत और राम राज्य की स्थापना का आधार बनेगा। जानिए कैसे यह कानून 125 दिन के रोजगार और साप्ताहिक भुगतान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलेगा।

गंगापुर सिटी। भारतीय राजनीति के गलियारों में 'विकसित भारत' और 'राम राज्य' की अवधारणा ने एक नई बहस छेड़ दी है। राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने गंगापुर सिटी में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया और सवाल उठाया कि आखिर विपक्षी दल को भगवान राम और विकसित भारत के नाम से इतनी चिढ़ क्यों है। बेढम ने 'वीबी जी राम जी' विधेयक को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी करार देते हुए कहा कि यह कानून केवल कागजी बदलाव नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की उन भावनाओं का प्रतिबिंब है जो हर गरीब के हाथ को काम और हर ग्रामीण को सम्मान देने का सपना देखती थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और यह नया कानून उसी भव्य ढांचे की नींव है, जो 'राम राज्य' की न्यायपूर्ण व्यवस्था को धरातल पर उतारेगा।
मंत्री बेढम ने ऐतिहासिक तथ्यों के जरिए कांग्रेस की 'नामकरण नीति' पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा योजनाओं में केवल एक परिवार के नाम को प्राथमिकता दी है। उन्होंने याद दिलाया कि 1980 में इंदिरा गांधी ने पुरानी योजनाओं को मिलाकर 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम' बनाया, जिसका नाम बाद में राजीव गांधी ने 'जवाहर रोजगार योजना' कर दिया। सोनिया-मनमोहन सरकार के दौरान इसे नरेगा और फिर मनरेगा किया गया। बेढम ने तंज कसते हुए पूछा कि जब कांग्रेस ने नेहरू जी के नाम वाली योजना का नाम बदला था, क्या वह उनका अपमान नहीं था? इसी तरह इंदिरा आवास योजना और राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के माध्यम से हर जगह जबरन एक ही परिवार के नाम थोपे गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार में नाम नहीं, बल्कि 'काम' बोलता है, जिसका परिणाम है कि 2011-12 में जो ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत थी, वह 2023-24 में घटकर महज 4.86 प्रतिशत रह गई है।
इस नए कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए जवाहर सिंह बेढम ने बताया कि यह 2025 की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। पुराने मनरेगा मॉडल की कमियों को दूर करते हुए अब मजदूरों को 15 दिन के बजाय हर सप्ताह भुगतान मिल सकेगा। ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना 125 दिन के रोजगार की गारंटी होगी, जबकि जनजाति क्षेत्रों (ST) में काम करने वालों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार दिया जाएगा। विधेयक में एक क्रांतिकारी बदलाव 'बुवाई और कटाई' के समय को लेकर किया गया है। सीजन के दौरान 60 दिन काम बंद रखने का प्रावधान किया गया है ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो और किसानों को राहत मिले। जल सुरक्षा, कोर-बुनियादी ढांचे का निर्माण और जलवायु अनुकूल कार्य इस योजना की चार मुख्य प्राथमिकताएं हैं, जो गांवों को न केवल सशक्त बनाएंगी बल्कि बाजार से उनकी सीधी कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित करेंगी।
मंत्री ने आंकड़ों की बाजीगरी को ध्वस्त करते हुए बताया कि मनरेगा पर अब तक हुए कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये के खर्च में से अकेले मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह दर्शाता है कि वर्तमान सरकार गरीबों के कल्याण के प्रति कितनी गंभीर है। ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर और आजीविका की विविधता का हवाला देते हुए उन्होंने अंत में कहा कि यह नया ढांचा केवल रोजगार नहीं देगा, बल्कि ग्रामीण आय में ऐतिहासिक वृद्धि लाएगा। 'वीबी जी राम जी' कानून के जरिए अब गांव का मजदूर भी गर्व के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनेगा, जिससे अंततः विकसित भारत का सपना साकार होगा।

Pratahkal Bureau
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