गंगापुर सिटी। अधिकारों की रक्षा के लिए जब संघर्ष की लौ जलती है, तो वह संगठन की असली शक्ति बनकर उभरती है। कुछ इसी संकल्प के साथ वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के तत्वावधान में गंगापुर सिटी स्थित एकीकृत लॉबी पर रनिंग स्टाफ का विरोध प्रदर्शन पांचवें दिन भी पूरे वेग के साथ जारी रहा। वर्किंग बीट के साथ की गई कथित छेड़छाड़ को लेकर रेल कर्मचारियों में व्याप्त आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। कड़ाके की ठंड और काम के दबाव के बीच भी कर्मचारियों का हौसला डिगा नहीं है, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय सदस्य पीसी मीणा ने हुंकार भरते हुए कहा कि किसी भी संगठन की वास्तविक पूंजी उसके समर्पित कार्यकर्ता और उनका न्याय के प्रति अटूट संघर्ष होता है। उन्होंने कर्मचारियों को ढांढस बंधाते हुए विश्वास दिलाया कि यदि एकजुटता कायम रही, तो सफलता निश्चित रूप से उनके कदम चूमेगी। मीणा ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि अधिकारियों की तानाशाही और मनमाने फैसलों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रशासन ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा को और अधिक व्यापक और उग्र बनाया जाएगा।

इस विरोध प्रदर्शन ने उस समय और अधिक मजबूती पकड़ी जब सैकड़ों की संख्या में रेलकर्मी एक स्वर में अपनी मांगों के समर्थन में लामबंद हुए। इस मौके पर मुजाहिद अली खान, भंवर सिंह कठेरिया, हरेत लाल मीणा, हंसराज मीणा, श्रीनिवास मीणा, राकेश गुर्जर, नरेश मीणा, कमलेश मीणा, धर्मेंद्र मीणा, राकेश मीणा, अमर सिंह, मोहम्मद मलिक, राजेश मीणा, सुरेश किराड़ी, विजेंद्र, रामनरेश मीना, महेश मीना, हंसराज मीणा, अतर सिंह मीणा, मुंशी राम मीणा, मदन सिंह मीणा और बबलू मीणा सहित भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वर्किंग बीट में बदलाव न केवल उनके कार्य की प्रकृति को प्रभावित करता है, बल्कि यह उनके अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

वर्तमान में यह आंदोलन गंगापुर सिटी रेलवे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। संघर्षरत कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनकी कार्यप्रणाली को लेकर नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और नियमों की शुचिता को बचाए रखने की है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, कर्मचारियों का यह समूह और अधिक संगठित हो रहा है, जो रेलवे प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह संवाद का रास्ता अपनाता है या फिर यह गतिरोध किसी बड़े औद्योगिक अशांति की ओर अग्रसर होगा।

Pratahkal Bureau

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