गंगापुर सिटी: राशन डीलरों का फूटा गुस्सा, लंबित मांगों और 'जेब से खर्च' को लेकर प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा
गंगापुर सिटी में राशन डीलर अध्यक्ष बनवारी लाल जोशी के नेतृत्व में डीलरों ने अपनी लंबित मांगों और आर्थिक शोषण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 2014 से अटके भुगतान, 15 अगस्त के खर्च की भरपाई और कोरोना काल के बकाया मानदेय को लेकर डीएसओ को ज्ञापन सौंपा गया। क्या प्रशासन सुनेगा डीलरों की पुकार? पूरी खबर पढ़ें।

गंगापुर सिटी। राजस्थान के गंगापुर सिटी में राशन डीलरों और प्रशासन के बीच लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब एक बड़े आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर चुकी है। सोमवार को राशन डीलर अध्यक्ष बनवारी लाल जोशी के नेतृत्व में डीलरों ने एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है, जिसमें वर्षों से लंबित भुगतान और सरकारी वादों की अनदेखी का सनसनीखेज खुलासा किया गया है। यह ज्ञापन न केवल व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि किस तरह जमीनी स्तर पर काम करने वाले डीलर विभागीय खींचतान और आर्थिक बोझ के तले दबे हुए हैं।
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु परिवहन और तुलाई से जुड़ी अव्यवस्थाएं हैं। राशन डीलरों का स्पष्ट कहना है कि गेहूं की गाड़ियों की तुलाई और परिवहन का व्यय पूर्णतः विभाग को वहन करना चाहिए। वर्तमान में यदि विभाग एक ही गाड़ी में तीन अलग-अलग डीलरों का गेहूं भेजता है, तो कांटा पर्ची का खर्च और अन्य जटिलताएं डीलरों के लिए सिरदर्द बन जाती हैं। डीलरों ने मांग की है कि पूर्व की भांति उनके पास गेहूं की रवानगी का मैसेज भेजा जाए और यदि गोदाम से प्राप्त गेहूं की मात्रा में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे बिल्टी पर दर्ज कर वास्तविक मात्रा के अनुसार ही प्राप्ति स्वीकार की जाए। यह मुद्दा पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार करता है, जिसे लेकर डीलर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक शोषण का है। बनवारी लाल जोशी ने आरोप लगाया कि सितंबर 2014 से लेकर अब तक डीलरों ने अपनी जेब से गाड़ी की ढुलाई का पैसा भरा है, जो विभाग के पास जमा है। डीलरों ने वर्ष 2025 तक का अपना बकाया प्रति क्विंटल के हिसाब से वापस दिलाने की गुहार लगाई है। इसके अतिरिक्त, पिछले 15 अगस्त के दौरान प्रशासन के एक आदेश ने डीलरों को भारी चपत लगाई है। आरोप है कि दुकान की पुताई, बैनर और मिठाई वितरण के लिए 5,000 रुपये देने का वादा किया गया था। डीलरों ने सरकारी आदेश का मान रखते हुए अपनी जेब से यह राशि खर्च की, लेकिन भुगतान के नाम पर उन्हें केवल दफ्तरों के चक्कर कटवाए गए। बताया गया है कि तत्कालीन डीएसओ श्री हरिलाल जी मीणा को बिल सौंपे गए थे, जिन्होंने इसे नगर परिषद गंगापुर सिटी को अग्रसारित कर दिया, लेकिन बजट की फाइलों में यह पैसा कहीं गुम होकर रह गया है।
संकट के समय में भी डीलरों की मेहनत की अनदेखी का एक और उदाहरण कोरोना काल का है। उस दौर में जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब राशन डीलरों ने 'डोर-टू-डोर' गेहूं वितरण के सरकारी आदेश का पालन किया था। इसके लिए डीलरों ने खुद गाड़ी और लेबर की व्यवस्था की, जिसमें प्रति दिन 1,500 रुपये गाड़ी का किराया और 500 रुपये प्रति मजदूर के हिसाब से खर्च किए गए। डीलरों की मांग है कि इस मद के बकाया 5,000 रुपये का भुगतान भी तत्काल किया जाए। इस ज्ञापन ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन मांगों पर संवेदनशीलता दिखाता है या फिर गंगापुर सिटी के राशन डीलरों का यह आक्रोश किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगा।

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