गंगापुर सिटी: शिक्षक संघ (सियाराम) के अधिवेशन में गूंजी पुरानी मांगों की गूंज, सरकार को घोषणा पत्र याद दिलाने का आह्वान
जयपुर में आयोजित राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन में शिक्षकों ने सरकार से चुनावी घोषणा पत्र के वायदे पूरे करने की मांग की। जुगल किशोर और विधायक गोपाल शर्मा की उपस्थिति में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने पर चर्चा हुई। शिक्षा और शिक्षक हितों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ें।

जयपुर/गंगापुर सिटी। राजस्थान की राजधानी जयपुर के आदर्श नगर स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय का प्रांगण शनिवार को शिक्षा जगत की वैचारिक क्रांति का केंद्र बन गया। राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के दो दिवसीय प्रांतीय शैक्षिक अधिवेशन के आगाज के साथ ही शिक्षकों ने अपनी मांगों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर हुंकार भरी। इस गरिमामय समारोह में न केवल शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा हुई, बल्कि प्रदेश की सत्ता पर काबिज सरकार को उसके चुनावी वायदों की याद दिलाते हुए स्पष्ट संदेश दिया गया कि शिक्षक अब अपने हक के लिए और अधिक प्रतीक्षा करने के मूड में नहीं हैं।
अधिवेशन का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं विश्व हिंदू परिषद की अखिल भारतीय कार्य समिति के सदस्य जुगल किशोर, सिविल लाइंस विधायक डॉ. गोपाल शर्मा, खेतड़ी विधायक धर्मपाल गुर्जर, आदर्श नगर विधायक प्रत्याशी रवि नैय्यर, राजस्थान कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) के प्रमुख महेंद्र सिंह और पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा की गरिमामय उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के संस्थापक एवं मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा ने की, जबकि संचालन प्रदेश महामंत्री एवं सम्मेलन संयोजक नवीन कुमार शर्मा द्वारा किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जुगल किशोर ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु पर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती है कि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें, तो उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से मुक्त करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षकों का प्राथमिक कार्य अध्यापन है और उन्हें बच्चों में संस्कार व राष्ट्रभक्ति का बीजारोपण करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। इसी क्रम में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि शिक्षक समाज का पथ-प्रदर्शक है और जब शिक्षक को याचक बनना पड़ता है, तो यह राष्ट्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने संगठन के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और आश्वस्त किया कि वे शिक्षकों का मांग पत्र पूरी मजबूती के साथ सरकार के समक्ष रखेंगे।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में तृतीय वेतन श्रृंखला शिक्षकों की डीपीसी और स्थानांतरण जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाया। वहीं, जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र शर्मा ने सीधे तौर पर भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को अपने वादों को धरातल पर उतारना चाहिए। अधिवेशन के दूसरे दिन मांगों का पिटारा खोलते हुए प्रदेश मंत्री सोहन लाल गुप्ता ने संस्कृत शिक्षा अधिकारी के नए पद सृजन, बीएलओ के अलग पद की व्यवस्था, रविवार की परीक्षाओं के बदले क्षतिपूर्ति अवकाश, और आरजीएचएस में पति-पत्नी दोनों के वेतन से कटौती के बावजूद लाभ में विसंगति जैसे तकनीकी व नीतिगत विषयों पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने पारदर्शी स्थानांतरण नीति और व्याख्याताओं के पदों के सृजन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस दो दिवसीय समागम में प्रदेश भर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें सुरेश चंद्र शर्मा, फिरोज खान, सुनील शर्मा, जितेंद्र वर्मा, कमलेश मीणा, सोहन लाल गुप्ता, गोपाल लाल गुप्ता, गिरीश कुमार गुप्ता, नरेश सिसोदिया, शिवचरण मीणा, श्रीजेश गुर्जर, सत्य प्रकाश गर्ग, कैलाश चंद शर्मा, महेश चंद जैन, चंद्रप्रकाश गर्ग, श्रीमती रेखा रानी मित्तल, साक्षी, विमलेश चतुर्वेदी, रघुवीर जाटव, पवन कुमार शर्मा और सुल्तान मीणा प्रमुख थे। यह अधिवेशन केवल मांगों का मंच नहीं रहा, बल्कि इसने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षक समाज न केवल अपने अधिकारों के प्रति सजग है, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के अपने उत्तरदायित्व को निभाने के लिए भी संकल्पित है।

