गंगापुर सिटी। भक्ति, शक्ति और सदाचार के अद्भुत संगम से सराबोर गंगापुर सिटी की फिजाएं इन दिनों देवी आराधना के जयकारों से गुंजायमान हैं। नहर रोड स्थित एक स्थानीय मैरिज होम में आयोजित पावन गुप्त नवरात्र के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्देवी भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा का ऐसा ज्वार उमड़ा कि श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। आचार्य अशोक दीक्षित ने व्यासपीठ से जीवन दर्शन की गंभीर मीमांसा करते हुए स्पष्ट किया कि साधना की सफलता केवल मंत्रों के जाप में नहीं, बल्कि साधक के चरित्र और सदाचार में निहित है। उन्होंने कड़े शब्दों में आगाह किया कि सदाचार विहीन साधना न केवल निष्फल होती है, बल्कि अनिष्टकारी भी सिद्ध हो सकती है।

कथा के इस विशेष पड़ाव पर देवी महात्म्य के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव बेहद उल्लास के साथ मनाया गया। पंडाल में जैसे ही रामलला के प्राकट्य की गूंज हुई, संपूर्ण परिसर 'भये प्रकट कृपाला' के उद्घोष से जीवंत हो उठा। इस अवसर पर कन्या पूजन का विशेष आयोजन किया गया, जिसने सनातन संस्कृति में नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया। आचार्य ने बताया कि नवरात्रि केवल व्रत-उपवास का पर्व नहीं, बल्कि खगोलीय और भौगोलिक ऊर्जा के संधिकाल में स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से ऊर्जामय बनाने का विज्ञान है। ऋतु परिवर्तन के इस दौर में संयमित जीवन और मंत्र साधना से आत्मबल का विकास होता है।

इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य यजमान रामगोपाल गुप्ता (वालों) सहित बालकृष्ण शर्मा, विकास राजोरिया, रवि, पवन सिंघल, सुरेश नौगांव, वासुदेव बंसल, निरंजन गुप्ता, अवधेश मंगल, राजेंद्र प्रसाद और रामचरण गंगादड़ा वालों ने विद्वान पंडितों के सानिध्य में विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। कथा के दौरान वाक शक्ति की अधिष्ठात्री मां शारदा और ऐश्वर्य प्रदायिनी माता लक्ष्मी के प्राकट्य प्रसंगों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में विख्यात भागवत विद्वान पंडित रमेश चंद्र शास्त्री का आगमन हुआ, जिनका मां चक्रपाणि भक्त मंडल द्वारा भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। शास्त्री जी ने अपने संबोधन में कहा कि मां भगवती सहज भाव और पूर्ण समर्पण से ही प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण आचार्य अशोक दीक्षित द्वारा रचित 'भजन स्तुति संग्रह' पुस्तक का विमोचन रहा, जिसे उपस्थित सभी श्रोताओं को निशुल्क वितरित किया गया। आचार्य ने अपने प्रवचन में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि आज समाज में कन्याओं को महत्व तो दिया जा रहा है, लेकिन उनमें 'देवी भाव' देखने की दृष्टि ओझल होती जा रही है, जिसके कारण दुराचार में वृद्धि हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कन्या पूजन के माध्यम से ही भावी पीढ़ी में नारी के प्रति सम्मान के संस्कार रोपे जा सकते हैं। कथा के आगामी क्रम में गुरुवार को नन्दोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसे लेकर क्षेत्र के भक्तों में भारी उत्साह व्याप्त है।

Pratahkal Newsroom

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