गंगापुर सिटी के बूचौलाई एवं मच्छीपुरा मंडल पर सर्व हिंदू समाज के तत्वाधान में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। मंच पर संत श्री हरीनंद गिरी जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग धर्म जागरण संयोजक संतोष शर्मा तथा सेवा प्रमुख मदन मोहन उपस्थित रहे।


संगठन की शक्ति और राष्ट्र की अखंडता

बुचौलाई कार्यक्रम में मुख्य वक्ता संतोष शर्मा ने कहा कि "राष्ट्र को अखंडित रखने के लिए इसके मूल हिंदू समाज को संगठित हो सशक्त रहने की आवश्यकता है।" शक्ति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि "शक्ति हमें किसी को हराने के लिए नहीं चाहिए परंतु कोई हमें तोड़कर कमजोर ना कर सके, भारत राष्ट्र पर, हिंदू संस्कृति पर आघात ना हो इसके लिए संगठित रहना होगा इसी उद्देश्य से पूरे भारत में अनेक स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं।"


विभाजन का इतिहास और संघ की स्थापना

  • आक्रांताओं ने षड्यंत्रपूर्वक हिंदू समाज को विभाजित किया।
  • 1857 की क्रांति के समय भारत का भूभाग 83 लाख वर्ग किलोमीटर था।
  • 1947 की आजादी के आते-आते यह टुकड़े होकर 33 लाख वर्ग किलोमीटर रह गया।

भविष्य में कोई आक्रांता ऐसा न कर सके, इसके लिए भारत के मूल हिंदू समाज को संगठित रखने हेतु डॉ हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ को अपने लिए कोई प्रसिद्धि नहीं चाहिए परंतु सभी लोग जाती पाती को छोड़ एकजुट रह भारत माता की सेवा की भावना से संगठित रहे, इसके लिए संघ समाज सुधार का काम करता रहा है।


सांस्कृतिक गौरव और पंच परिवर्तन का आह्वान

उन्होंने भारत के गौरवशाली अतीत का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति कला, विज्ञान, चिकित्सा सहित हर क्षेत्र में समृद्ध रही है। हमें इसे नहीं भूल भाषा, भूषा, भोजन, भ्रमण अपनी संस्कृति अनुसार ही करना चाहिए। समाज से 'पंच परिवर्तन' का आह्वान किया गया:

  1. कुटुंब प्रबोधन
  2. सामाजिक समरसता
  3. पर्यावरण संरक्षण
  4. स्व का बोध
  5. नागरिक कर्तव्य का पालन

इनके माध्यम से राष्ट्र को उन्नत बनाने का आह्वान किया गया जिससे हम उत्कृष्ट समाज और पुरातन संस्कृति की पुनर्स्थापना कर सके। हमें प्रण लेना चाहिए जब हम देश की आजादी का शताब्दी वर्ष मना रहे होंगे तो समाज को संगठित कर परम वैभवशाली राष्ट्र बना सके। हम सब सुख दुख में सभी के काम आए जिससे हर विषम परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सके।


जनरेशन गैप और जनसंख्या पर चिंता

संतोष शर्मा ने हिंदू समाज में बढ़ते जनरेशन गैप तथा घटती जनसंख्या पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि "यह सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक है, संवैधानिक आयु में बच्चों के विवाह से हमें इसका समाधान करना होगा।"


गौ सेवा और मच्छीपुरा सम्मेलन का संदेश

मंचासीन संत श्री हरीनंद गिरी ने गौ माता की शास्त्रोन्मुख महिमा पर कहा कि "सभी सनातनियों को गौ माता की सेवा, सम्मान तथा संरक्षण करना चाहिए क्योंकि जहां जहां गौ माता कम हुई है वहां हिंदू कम हुआ है।" उन्होंने चेतावनी दी कि देशी नस्ल की गौ माता, जो भारतीय संस्कृति व सनातन परम्परा का मूल आधार है, आज संकट में है; हमें उसे बचाना होगा नहीं तो हमारा अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। मच्छीपुरा में मुख्य वक्ता मदन मोहन ने समाज से पंच परिवर्तन को अपनाकर हर परिस्थिति में एकजुट रहने का आह्वान किया।


कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण और आयोजन

कार्यक्रम स्थल पर अनेक महापुरुषों के चित्रों को प्रदर्शित किया गया साथ में छोटे बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।

  • कलश यात्रा: बूचौलाई में 101 महिलाओं द्वारा धार्मिक कीर्तन के साथ धर्ममय कलश यात्रा निकाली गई।
  • पद दंगल: शेरसिंह मेड़िया समूह द्वारा ढोल नगाड़ों के साथ पद दंगल गायन किया गया, जिसमें लोकगीत के माध्यम से कुरीतियों को छोड़ समाज सुधार की प्रेरणा दी गई।
  • आभार: सर्व हिंदू समाज आयोजन समिति संयोजक श्रीलाल बाबूजी तथा मंच संचालक सत्यनारायण धाभाई ने सभी नागरिकों, भामाशाहों व कार्यकर्ताओं का प्रसाद वितरण कर आभार व्यक्त किया।

उपस्थित गणमान्य नागरिक

सम्मेलनों में निम्नलिखित कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित रहे:

संघ खंड कार्यवाह भीम सिंह गुर्जर, कार्यकर्ता शेरसिंह, हर्षित शुक्ला, नितिन जोशी, रामभरोसी शर्मा, रामस्वरूप धाभाई, बनैसिंह गुर्जर, रामसिंह, हेमंत वैष्णव, अक्षय, चंदन गुर्जर सहित आसपास के गांवों के अनेक ग्रामवासी मौजूद रहे।

Pratahkal Newsroom

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