गंगापुर सिटी: भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित निःशुल्क बाल संस्कार शिविर का तीसरा दिन
शिविर में महिलाओं और बालिकाओं के लिए सिलाई-बुनाई प्रशिक्षण के साथ चित्रकला और मेहंदी डिजाइन की गतिविधियां आयोजित की गई।

गंगापुर सिटी के बद्रीनाथ जी मंदिर परिसर में आयोजित आठ दिवसीय 'बाल संस्कार एवं अभिरुचि शिविर' के दौरान सिलाई, चित्रकला और मेहंदी का प्रशिक्षण लेतीं महिलाएं एवं छात्राएं।
गंगापुर सिटी। भारत विकास परिषद, शाखा-कुशालगढ़ (राजस्थान पूर्व) द्वारा अग्रवाल खंडेलवाल भवन, बद्रीनाथ जी मंदिर परिसर में आयोजित आठ दिवसीय निःशुल्क 'बाल संस्कार एवं अभिरुचि शिविर' अपने तीसरे दिन कौशल विकास और नवाचार का केंद्र बन गया। शिविर के आगे बढ़ते चरणों के साथ, महिलाओं और बालिकाओं में आत्मनिर्भरता की प्रबल इच्छाशक्ति स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। भीषण गर्मी के बावजूद, प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि यह आयोजन अपने निर्धारित उद्देश्यों की दिशा में न केवल अग्रसर है, बल्कि अत्यंत सफल भी सिद्ध हो रहा है।
शिविर के तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण सिलाई एवं बुनाई प्रशिक्षण रहा, जहाँ बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिलाई मशीनों पर परिधान निर्माण की बारीकियों को आत्मसात किया। अनुभवी प्रशिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में, बालिकाओं ने कपड़ों की ड्राफ्टिंग और कटिंग के तकनीकी कौशल सीखे, जो भविष्य में उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। वहीं, परिसर के दूसरे भाग में सृजनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। बालिकाओं ने चित्रकला और मेहंदी डिजाइन के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया, जबकि साथ ही उन्हें नैतिक मूल्यों और दैनिक जीवन में संस्कारों की महत्ता से अवगत कराया गया।
इस आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने में परिषद के पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सरिता बंसल और महिला गतिविधि संयोजक श्रीमती अंजू मालधानी ने प्रत्येक गतिविधि का बारीकी से निरीक्षण कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। परिषद के अध्यक्ष आनंद पैंगोरिया, सचिव विमल चन्द जैन और वित्त सचिव अमित कुमार गुप्ता (तारू) ने सामुदायिक सहभागिता की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। सहसंयोजक टीम की सुमन गुप्ता, देवल गोयल, सुनीता गुप्ता, आशा गुप्ता और कोमल शर्मा के सक्रिय सहयोग से सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हुईं। आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि शिविर में अभी कई अन्य विधाओं का प्रशिक्षण शेष है, जिसके लिए अन्य बालिकाएं भी समयबद्ध होकर इसका लाभ उठा सकती हैं। यह शिविर केवल हुनर सीखने का मंच नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को संस्कारों और कौशल से सुसज्जित करने का एक सार्थक प्रयास है।

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