गंगापुर सिटी। राजस्थान के शैक्षिक जगत में शिक्षकों और शिक्षार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले 'राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम' के मुख्य संरक्षक एवं प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम का 75वां जन्मदिवस बड़े ही हर्षोल्लास और सेवा भाव के साथ मनाया गया। सवाई माधोपुर जिला संघ के कार्यकर्ताओं ने इस विशेष अवसर को केवल एक उत्सव तक सीमित न रखकर सेवा का माध्यम बनाया। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल मीणा, प्रदेश मंत्री सोहन लाल गुप्ता और जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में भारी संख्या में शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि गोपाल गौशाला पहुंचे, जहां उन्होंने गायों को हरा चारा एवं गुड़ खिलाकर अपने मार्गदर्शक की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान संगठन की शक्ति और सियाराम के योगदान पर चर्चा करते हुए प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल मीणा ने कहा कि सियाराम एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के लिए 24 घंटे तन, मन और धन से तत्पर रहते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सत्ता में कोई भी सरकार रही हो, सियाराम ने कभी भी शिक्षकों के मुद्दों पर समझौता नहीं किया और मुखर होकर उनकी आवाज बुलंद की। प्रदेश मंत्री सोहन लाल गुप्ता ने उनके अनुशासित जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 75 वर्ष की आयु में भी वे ऊर्जा से लबरेज हैं। जयपुर स्थित संघ का कार्यालय, जो शिक्षकों के लिए एक आश्रय स्थल के समान है, वहां सियाराम प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक उपस्थित रहकर प्रदेशभर से आने वाले शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करते हैं। यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा शिक्षक संगठन है जिसका अपना सुव्यवस्थित कार्यालय है, जहाँ शिक्षक न केवल कार्य हेतु आ सकते हैं बल्कि ठहरने की सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं।

गौशाला में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में संगठन की एकजुटता और अपने नेतृत्व के प्रति अगाध श्रद्धा देखने को मिली। इस गरिमामयी अवसर पर जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र शर्मा के साथ अरविंद गुप्ता (महेशवा वाले), गोपाल लाल गुप्ता, नरेश सिसोदिया, गिरीश कुमार गुप्ता, महेश जैन, रामदयाल मीणा, सोहन लाल गुप्ता, रामबाबू शर्मा, हनुमान प्रसाद शर्मा और नरेंद्र कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में अन्य शिक्षक बंधु उपस्थित रहे। शिक्षकों के हितों के लिए संघर्ष की मिसाल पेश करने वाले सियाराम का यह जन्मदिवस न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का सम्मान था, बल्कि संगठन के उस सेवाभावी संकल्प को भी दोहराता है जो पिछले कई दशकों से राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक कल्याण की धुरी बना हुआ है।

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