डॉ. सूरज प्रकाश जयंती: भारत विकास परिषद ने आयोजित की संगोष्ठी
इन्द्रा कॉलोनी में आयोजित साधारण सभा की बैठक को जीवनी वाचन संगोष्ठी का स्वरूप दिया गया, जहां प्रबुद्ध वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला।

तस्वीर में भारत विकास परिषद के सदस्य इन्द्रा कॉलोनी में डॉ. सूरज प्रकाश जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान एक यू-आकार की मेज के चारों ओर खड़े और बैठे हुए नजर आ रहे हैं, जबकि पृष्ठभूमि में मुख्य बैनर लगा है।
भारत विकास परिषद के संस्थापक, महान शिक्षाविद् एवं प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. सूरज प्रकाश की जयंती शनिवार को श्रद्धा और प्रेरणा के वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर परिषद की साधारण सभा की बैठक को विशेष 'जीवनी वाचन संगोष्ठी' का स्वरूप दिया गया, जिसमें प्रबुद्ध वक्ताओं ने डॉ. सूरज प्रकाश के जीवन के प्रेरक प्रसंगों का सस्वर वाचन कर उनके आदर्शों को व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में आत्मसात करने का सामूहिक संकल्प लिया। संगोष्ठी का आयोजन इन्द्रा कॉलोनी में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाखा अध्यक्ष प्रदीप गर्ग ने की, जबकि राष्ट्रीय गतिविधि सदस्य-सम्पर्क हरी प्रसाद शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
शाखा सचिव उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सूरज प्रकाश के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि एवं वंदेमातरम् के सामूहिक गान के साथ हुआ। मुख्य वक्ता हरी प्रसाद शर्मा ने डॉ. सूरज प्रकाश के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण के पंचसूत्रों का प्रतिपादन कर भारत विकास परिषद जैसी राष्ट्रव्यापी सेवाभावी संस्था की मजबूत नींव रखी, जो आज पूरे देश में सामाजिक एवं राष्ट्रीय चेतना का प्रभावी संदेश दे रही है।
संगोष्ठी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि पारंपरिक व्याख्यान पद्धति के स्थान पर इसे जीवंत जीवनी वाचन के रूप में आयोजित किया गया। परिषद के प्रबुद्ध सदस्यों ने डॉ. सूरज प्रकाश की प्रामाणिक जीवनी के विभिन्न अध्यायों और प्रेरक प्रसंगों का क्रमवार सस्वर वाचन करते हुए उनके संदेशों को रेखांकित किया।
प्रभाकर शर्मा ने डॉ. सूरज प्रकाश के प्रारंभिक जीवन, भारत विभाजन तथा विस्थापितों के पुनर्वास कार्य से जुड़े प्रसंगों का वाचन करते हुए विभाजन के समय शरणार्थियों की सेवा में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। जितेंद्र द्विवेदी ने डॉ. साहब के दिल्ली आगमन, सिटीजन काउंसिल की स्थापना तथा भारत विकास परिषद की स्थापना से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम को प्रस्तुत किया।
वीरेंद्र गुप्ता ने परिषद के आरंभिक कार्यों एवं संगठनात्मक चुनौतियों के दौरान डॉ. साहब के धैर्य और अटूट विश्वास से जुड़े प्रसंगों का वाचन किया। महावीर सिंहल ने परिषद के देशव्यापी विस्तार, राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता तथा 'नीति' पत्रिका के प्रकाशन जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों की जानकारी दी। सीए कपिल नामा ने डॉ. साहब की अद्वितीय कार्यनिष्ठा और उनके चुंबकीय व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व से प्रेरित होकर राष्ट्रभक्त स्वतः सेवा कार्यों से जुड़ते चले गए।
चित्रा गर्ग ने डॉ. सूरज प्रकाश के आडंबर रहित निस्वार्थ सेवा भाव से जुड़े प्रसंगों का वाचन करते हुए सेवा को सदैव मौन और दिखावे से दूर रखने की प्रेरणा दी। प्रीति गुप्ता ने परिषद में महिला सहभागिता की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। सूर्यकान्त गोयल ने डॉ. साहब के 'सादा जीवन, उच्च विचार' के मूल दर्शन का वाचन किया। शाखा अध्यक्ष प्रदीप गर्ग ने जीवनी के संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े अध्याय का वाचन करते हुए कहा कि अनुशासन किसी भी संस्था की आत्मा होता है और डॉ. सूरज प्रकाश ने स्वयं कठोर अनुशासन का पालन कर आदर्श स्थापित किया।
शाखा सचिव उमेश कुमार गुप्ता ने डॉ. सूरज प्रकाश की समयबद्धता तथा समाज के सर्वांगीण विकास की दूरदृष्टि से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का वाचन किया। जीवनी वाचन के उपरांत संगोष्ठी में उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में डॉ. सूरज प्रकाश के जीवन मूल्यों, आदर्शों और प्रेरक प्रसंगों को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में पूर्णतः आत्मसात करने तथा परिषद के सेवा प्रकल्पों को और अधिक गति प्रदान करने का सामूहिक संकल्प लिया।
समापन अवसर पर शाखा अध्यक्ष प्रदीप गर्ग ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. सूरज प्रकाश को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब परिषद के सेवा कार्यों को और अधिक सुदृढ़, व्यापक एवं जनोपयोगी बनाया जाएगा। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ।

Pratahkal Bureau
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