गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र के चूली ग्राम पंचायत में शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर अरावली पहाड़ियों की गोद में स्थित धूधेश्वर धाम लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है। धार्मिक, पौराणिक, पर्यावरणीय और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थल की लगातार उपेक्षा के कारण यहां विकास की संभावनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।

राज रजवाड़ों के समय स्थापित धूधेश्वर धाम क्षेत्र का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र में आने वाला यह एकमात्र प्रसिद्ध पौराणिक, धार्मिक, रमणीक और प्राकृतिक धरोहर स्थल बताया जाता है। यहां पौराणिक धार्मिक दृष्टि से सोलेश्वर रूप में शिव मंदिर विराजमान है। इसके साथ राधा-कृष्ण का भव्य मंदिर भी है। चारों तरफ हरियाली के बीच वर्षाकाल में यहां चार बड़े झरने बहते हैं।

राज रजवाड़ों के समय चौमासे के चार महीनों में राजा-महाराजाओं की कचहरी भी यहां भरा करती थी। धूधेश्वर धाम में गुप्त गंगा से निरंतर जलधारा बहती है और स्नान आदि के लिए बड़े-बड़े कुंड बने हुए हैं। श्रावण मास में आसपास के श्रद्धालु बेलपत्र चढ़ाने और पूजा-पाठ के लिए यहां पहुंचते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य के कारण वर्षाकाल में यह स्थल पिकनिक के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता है। आसपास के क्षेत्र की आम जनता और श्रद्धालु यहां पहुंचकर गौठ पार्टी का आयोजन करते हैं तथा झरनों का आनंद लेते हैं।

धूधेश्वर धाम के विकास को लेकर वर्ष 1990 के दशक में नगर पालिका बोर्ड द्वारा पर्यटन मंत्री नरेंद्र कंवर का दौरा कराया गया था। उस समय विकास का आश्वासन दिया गया था। नगर पालिका बोर्ड की विकास पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर धूधेश्वर धाम के चित्र को स्थान देकर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना का उल्लेख किया गया था, लेकिन इसके बाद क्षेत्र का कोई विकास नहीं हो सका और आश्वासन भी पूरे नहीं हुए।

क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से भी कोई रुचि नहीं दिखाई गई। समाजसेवी वेद प्रकाश मंगल ने बताया कि वह लगभग तीन दशक से धूधेश्वर धाम के विकास के लिए राज्य और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

वर्ष 2008-10 में केंद्र सरकार की एक टीम ने धूधेश्वर धाम का सर्वे किया था और जिला कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपनी थी। टीम ने क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली गई।

वर्ष 2015 के आसपास तत्कालीन विधायक मानसिंह गुर्जर ने क्षेत्र के विकास एवं जीर्णोद्धार के लिए देवस्थान विभाग से लगभग 3 करोड़ रुपये की राशि आवंटित कराकर जीर्णोद्धार करवाया था, लेकिन यह कार्य भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ।

इसके बाद वर्ष 2021-22 में क्षेत्रीय विधायक रामकेश मीणा ने धूधेश्वर धाम का दौरा किया था। उन्होंने यहां विकास कराने और इसे पर्यटन क्षेत्र से जोड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन भी ठंडे बस्ते में चला गया।

समाजसेवी वेद प्रकाश मंगल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र के एकमात्र पौराणिक स्थल धूधेश्वर धाम के विकास की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री महोदय सदैव धार्मिक आयोजनों और धार्मिक उत्सवों से जुड़े रहते हैं तथा उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से गंगापुर विधानसभा क्षेत्र की अरावली पहाड़ियों और प्रकृति की गोद में स्थित इस पौराणिक स्थल पर ध्यान देकर विकास कराने की मांग रखी है।

जागरूक लोगों का कहना है कि शहर के एकमात्र पर्यटन स्थल धूधेश्वर धाम में विकास की प्रबल संभावनाएं हैं। यदि इस क्षेत्र का विकास कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो जिला सवाई माधोपुर में शिवाड़ धाम जैसा या उससे बेहतर प्राकृतिक, अलौकिक, रमणीक और पर्यावरण से जुड़ा स्थल क्षेत्रवासियों को मिल सकता है। इससे यह स्थान शहर के विकास, पर्यटन, धार्मिक आस्था और पौराणिक धरोहर की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

लगभग चार दशक से धूधेश्वर धाम विकास की बाट जोह रहा है। राजनीतिक दलों, सरकारों और जनप्रतिनिधियों की ओर से समय-समय पर दिए गए आश्वासनों के बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हो सका। धूधेश्वर धाम की स्थिति क्षेत्र के विकास में जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को प्रकट करती है।

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