जिला स्वास्थ्य समिति बैठक में कलक्टर ने दिए सख्त निर्देश, स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक समीक्षा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने दी प्रगति रिपोर्ट, मानसून और मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में बनी रणनीति।

जिला कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को जिला कलक्टर काना राम की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मौसमी बीमारियों और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा की गई।
जिला स्वास्थ्य समिति की जिला स्तरीय बैठक सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर काना राम की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और सुधारात्मक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों की पालना तथा जिले की वर्तमान प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। इसके बाद जिला कलक्टर ने डीएचआईएस, आईएचएमएस के तहत ओपीडी एवं आईपीडी की स्थिति, आभा आईडी निर्माण, पीसीटीएस व आईएचएमएस डाटा मैचिंग, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना की प्रगति सहित विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों की विस्तार से समीक्षा की।
कलक्टर ने एनसीडी कार्यक्रम के अंतर्गत सीबीएसी फॉर्म, स्क्रीनिंग, फॉलोअप, एनसीडी मरीजों की निगरानी, डिलीवरी ड्यू केस, दस्तावेज संकलन, एनक्यूएएस, एचपीवी टीकाकरण, जननी सुरक्षा योजना, माँ वाउचर योजना, एएनसी रजिस्ट्रेशन, 12 सप्ताह पूर्व पंजीकरण, पूर्ण एएनसी कवरेज, पीपीआईयूसीडी, अंतरा गर्भनिरोधक, टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय आईडी, निक्षय मित्र, निक्षय पोषण किट वितरण, नाट टेस्ट और चेस्ट एक्स-रे जैसी गतिविधियों की भी गहन समीक्षा की।
उन्होंने सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्रों में सेक्टर मीटिंग आयोजित कर सभी सूचकांकों की नियमित समीक्षा करें, गैप्स के कारणों की पहचान करें तथा फील्ड विजिट को प्रभावी बनाएं। उन्होंने आशा, सीएचओ और एएनएम को फील्ड स्तर पर सक्रिय रहकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिला कलक्टर ने शहरी एवं ग्रामीण सेवा शिविरों में मातृत्व स्वास्थ्य, टीबी और एनसीडी सेवाओं का प्रभावी कवरेज सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मानसून को देखते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों के भवनों का निरीक्षण, मरम्मत योग्य स्थानों की पहचान तथा असुरक्षित भवनों का उपयोग न करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने जलभराव की स्थिति में त्वरित निकासी व्यवस्था, संपर्क बाधित क्षेत्रों की पहचान और गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव हेतु विशेष तैयारियों पर बल दिया।
इसके अलावा मौसमी बीमारियों के लिए आवश्यक किट एवं जांच सुविधाएं उपलब्ध रखने, आपदा प्रबंधन टीम को प्राथमिक उपचार, सीपीआर और बचाव प्रशिक्षण देने के निर्देश भी जारी किए गए। बैठक के अंत में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की गई।

Pratahkal Bureau
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