सवाई माधोपुर, 29 नवम्बर। राईजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में हुए एमओयू अब धरातल पर साकार होने लगे हैं। इसी कड़ी में जिले के कुश्तला में स्थापित मैसर्स एस.एन.एल. इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड की आधुनिक अमरूद प्रसंस्करण इकाई का शनिवार को जिला कलक्टर काना राम ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर ने न केवल जिले में कृषि-आधारित औद्योगिक विकास को नई गति देने का संदेश दिया, बल्कि हजारों अमरूद उत्पादक किसानों के लिए भी नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोल दिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर ने कहा कि यह केवल एक उद्योग का उद्घाटन नहीं, बल्कि जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस यूनिट के शुरू होने से स्थानीय किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, बाजार में उतार–चढ़ाव से राहत मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कलक्टर ने यूनिट संचालकों को निर्देश दिए कि किसानों को वास्तविक समय में पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक प्रभाव तेजी से दिखाई दे।

जिला कलक्टर ने बताया कि जिले में लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद की खेती होती है, लेकिन उचित बाजार मूल्य न मिलने के कारण किसानों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप स्थापित यह यूनिट किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। एफपीओ के माध्यम से हब एंड स्पोक मॉडल लागू कर किसानों को सीधे इस प्रसंस्करण परियोजना से जोड़ा जाएगा।

जिले में अमरूद में बढ़ती निमाटोड बीमारी की समस्या पर भी प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। इस संबंध में अगले सप्ताह एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें किसानों को निःशुल्क उपचार किट उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही पक्षियों और परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पैकेजिंग सामग्री और अमरूद केप भी निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। जनवरी माह में जिले में 'अमरूद महोत्सव' आयोजित होगा, जिसमें आईसीएआर कृषि विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय स्तर के उत्पादक एवं प्रोसेसर, विपणन संस्थान और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे।

एस.एन.एल. इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुधांश गुप्ता ने बताया कि यह यूनिट आगे चलकर आंवला, मिर्च, टमाटर, आम और लीची सहित अन्य फलों व सब्जियों की भी प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बगीचों में खराब होकर गिरने वाले पीले अमरूद भी अब किसानों को 8 रुपये प्रति किलोग्राम के मूल्य पर बेचे जा सकेंगे, जिससे उनकी आय में सीधा इजाफा होगा। कंपनी फिलहाल प्रति घंटे 500 किलोग्राम अमरूद पल्प तैयार कर रही है और प्रतिदिन 4 से 5 टन पल्प उत्पादन हो रहा है। आगामी चरण में यह क्षमता बढ़ाकर 10 टन प्रतिदिन की जाएगी, जिससे प्रतिदिन 12 से 15 टन अमरूद की खपत संभव होगी। आगे जूस, जैली, मुरब्बा सहित अनेक वैल्यू-ऐडेड उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। लगभग 15 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 150 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संभावनाएँ भी जताई गईं।

उपस्थित किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि वर्षों से खराब होने वाले अमरूद अब भी मूल्य देंगे और भविष्य में विपणन के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इस यूनिट ने किसानों के लिए आर्थिक स्थिरता और भविष्य की संभावनाओं का नया अध्याय खोल दिया है।

कार्यक्रम में उद्योग महाप्रबंधक पंकज कुमार मीना, एलडीएम प्रवीण कुमार, उप निदेशक उद्यान सी.पी. बड़ाया, कृषि अधिकारी (आत्मा) अमर सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा जिले के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau

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