गंगापुर सिटी में जैन समाज की संपत्ति पर फर्जी पट्टे का विवाद, उप जिला कलेक्टर से निरस्ती की मांग
गंगापुर सिटी में दिगंबर जैन समाज की संपत्ति पर फर्जी पट्टे का मामला सामने आया। जैन समाज ने उप जिला कलेक्टर से पट्टा रद्द करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। समाज में आक्रोश बढ़ता देख प्रशासनिक कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया गया।

गंगापुर सिटी। घी वाली गली स्थित दिगंबर जैन मंदिर के पास की दिगंबर जैन समाज की संपत्ति को लेकर एक बार फिर विवाद उत्पन्न हो गया है। आरोप है कि कुछ व्यक्तियों ने मिलकर नगर परिषद से फर्जी पट्टा बनवाकर जैन समाज की लंबे समय से संपत्ति पर अवैध दावा किया है, जिससे जैन समाज में गहरा आक्रोश है।
सूत्रों के अनुसार, दिगंबर जैन मंदिर की यह संपत्ति देवस्थान विभाग राजस्थान, जयपुर में रजिस्टर्ड है और इस पर स्थित दुकानों को सन 1963 से मंदिर द्वारा किराए पर दिया गया है। मंदिर सेवादार परिवार इन दुकानों की ऊपरी मंजिल में रह रहा है। इसके बावजूद, पड़ोस में रहने वाले राधेश्याम, रमेश, देवकीनंदन, दिनेश और राजेश मधुबन सुपुत्र स्व. सूरजमल ने अपनी मान्यता के अनुरूप नगर परिषद से पट्टा संख्या 633 दिनांक 4/5/2022 प्राप्त कर लिया। आरोप है कि उन्होंने गवाह गिरिराज, पत्र रूप नारायण महाजन व शिवचरण पुत्र मदनलाल से गलत शपथ पत्र बनवाकर यह प्रक्रिया पूरी की।
घटना का खुलासा तब हुआ जब जैन समाज ने इस दुकान में बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग में आवेदन किया। बिजली विभाग के कर्मचारी जब मीटर लगाने पहुंचे, तो रमेश पुत्र सूरजमल ने संपत्ति पर अपने दावे का हवाला देते हुए मीटर लगाने में रोड़ा अटकाया। इस पर जैन समाज के पदाधिकारियों ने जांच-पड़ताल की तो पता चला कि पट्टा बिना किसी सही जांच के, नगर परिषद और कुछ व्यक्तियों की मिलीभगत से जारी किया गया।
गत 20 नवंबर को जैन समाज का प्रतिनिधि मंडल अध्यक्ष प्रवीण गंगवाल के नेतृत्व में उप जिला कलेक्टर बृजेंद्र मीना और थाना अधिकारी करण सिंह से मिला। थाना अधिकारी ने दोनों पक्षों को बुलाकर वार्ता की। राधेश्याम, रमेश और मधुबन सहित अन्य दोषियों ने अपनी गलती स्वीकार की और पट्टे को रद्द कराने की कार्रवाई का आश्वासन दिया।
हालांकि, सात दिन बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे जैन समाज में आक्रोश बढ़ गया। शुक्रवार को प्रवीण गंगवाल के नेतृत्व में जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य सुभाष जैन पांड्या, नरेंद्र जैन गंगवाल, अरिहंत जैन बोहरा, सुमेर जैन सोनी, डॉ. मनोज जैन सहित दर्जनों अन्य बंधुओं ने उप जिला कलेक्टर से मुलाकात की और फर्जी पट्टे को तुरंत निरस्त करने की मांग की। साथ ही, समाज ने थाना अधिकारी के समक्ष दोषियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करवाई।
जैन समाज के पदाधिकारीयों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उचित कार्रवाई नहीं की और फर्जी पट्टे को रद्द नहीं किया, तो वे आवश्यकतानुसार आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होंगे। यह मामला न केवल धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से गंभीर है, बल्कि संपत्ति अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है।

Pratahkal Bureau
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