एक उदास सुबह और ढहता भरोसा

आज सुबह हवा सहमी हुई थी, जैसे उसे पता हो कि आज किसी का घर उजड़ेगा। रास्ते किनारे खड़ा वह पेड़ सालों से धूप-बारिश सहता रहा, पर आज मशीनों की कर्कश आवाज उसकी जड़ों तक उतर गई।

अधूरी ममता और कुचलते सपने

  • सबसे ऊंची टहनी पर तिनकों का छोटा-सा घोंसला था—एक मां चिड़िया और उसके तीन नन्हे बच्चे।
  • वे उड़ना नहीं जानते थे, सिर्फ मां और उस पेड़ पर भरोसा था।
  • मां दाना लेने गई ही थी कि लोहे की धार तने से टकराई।

विनाश का क्षण

"पेड़ कराहा… घोंसला डोला… नन्ही चोंचों से निकला— 'मां…'"

पर अगले ही पल पेड़ धरती पर गिर पड़ा। तिनके बिखर गए, तीन अधूरी उड़ानें मिट्टी में सिमट गईं।

खामोश चीख और सन्नाटा

मां लौटी तो वहां सिर्फ धूल और सन्नाटा था। वह चीखती रही, मंडराती रही, पर कोई आवाज नहीं आई।

विकास बनाम संवेदनशीलता

सड़क अब चौड़ी है, गाड़ियां तेज दौड़ती हैं। लोग कहते हैं “विकास हो रहा है।” पर उस सड़क के नीचे दबी है एक मां की गोद, और एक सवाल— क्या विकास इतना निर्दयी होना जरूरी था?

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

नाम: हरक चंद जैन

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)

परिचय

हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
  • अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।

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