दौसा सड़क दुर्घटना के बाद मुख्य सचिव ने ली सुरक्षा समीक्षा बैठक
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुई दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा मानकों में सुधार, रिफ्लेक्टर टेप और आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के दिए निर्देश।

शासन सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं।
जयपुर, 2 जुलाई। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा जिले में हुई भीषण सड़क दुर्घटना को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य स्तरीय निरीक्षण दल की तथ्यों एवं विस्तृत विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि यह दुर्घटना सभी संबंधित विभागों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में अमूल्य जनहानि को अस्वीकार्य बताते हुए दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में निरंतर कमी लाने तथा जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य के साथ प्रभावी सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने दुर्घटना के क्रम, दुर्घटनाग्रस्त बस एवं ट्रेलर की स्थिति, दोनों वाहनों के पंजीयन, फिटनेस, बीमा, लंबित चालानों, वाहन स्वामियों एवं चालकों की पृष्ठभूमि की समीक्षा की। उन्होंने अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों के संबंध में संबंधित राज्यों के परिवहन विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक जांच शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। बस की बॉडी, संरचनात्मक सुरक्षा, आग लगने के कारणों तथा एफएसएल जांच की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने दुर्घटना स्थल पर उपलब्ध सीसीटीवी एवं पीटीजेड कैमरों की फुटेज का अवलोकन करते हुए दुर्घटना के समय की परिस्थितियों, ट्रेलर की दृश्यता, लेन ड्राइविंग, रात्रिकालीन विजिबिलिटी, रिफ्लेक्टर टेप एवं रिफ्लेक्टर लाइट, मार्ग संकेतकों तथा ट्रम्पेट इंटरचेंज पर भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुरूप साइनेज व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर मोड़ से पर्याप्त दूरी पहले बड़े एवं स्पष्ट साइनेज लगाए जाएं तथा ब्लैक स्पॉट्स और रात्रिकालीन दृश्यता के लिए अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने पुलिस, एनएचएआई कंट्रोल सेंटर, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड एवं अन्य आपातकालीन एजेंसियों की रिस्पॉन्स टाइम, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने की कार्रवाई, घायलों को अस्पताल पहुंचाने में लगे समय, ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धता, भौगोलिक दूरी तथा पोस्ट एक्सीडेंट इन्जरी मैनेजमेंट का विस्तृत आकलन किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद होने वाली मृत्यु को न्यूनतम करना भी सड़क सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण पक्ष है जितना दुर्घटनाओं की रोकथाम।
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों पर संचालित बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस को चरणबद्ध तरीके से एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस में उन्नत करने के निर्देश दिए ताकि गंभीर घायलों को घटनास्थल पर ही बेहतर जीवनरक्षक उपचार मिल सके। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर, फायर फाइटिंग व्हीकल्स, क्रेन तथा अन्य आपातकालीन संसाधनों की वैज्ञानिक दूरी पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समुचित कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण के विरुद्ध राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक जिले में सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में जिला कलक्टर नियमित मॉनिटरिंग करें तथा अतिक्रमणों और अवैध पार्किंग स्थलों का चिन्हीकरण कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।
परिवहन विभाग को निर्देशित करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर भारी एवं वाणिज्यिक वाहनों में रिफ्लेक्टर टेप की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा। रिफ्लेक्टर एवं सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध चालान सहित प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई करने, वाहन पोर्टल पर अधिक लंबित चालान वाले वाहनों के विरुद्ध निवारक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा परिवहन यूनियनों एवं बस ऑपरेटरों के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर सड़क सुरक्षा नियमों की प्रभावी पालना कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में वे-साइड एमेनिटीज, ट्रक चालकों के लिए डॉर्मिटरी एवं विश्राम सुविधाओं, आईटीएमएस की कार्यप्रणाली, रियल टाइम प्रवर्तन, ओवरस्पीडिंग चालान, हाईवे दुर्घटनाओं के विश्लेषण, अतिरिक्त ब्लैक स्पॉट चिन्हीकरण, फायर ब्रिगेड की रणनीतिक पोजिशनिंग तथा निवारक निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभाग निर्धारित दायित्वों का समयबद्ध पालन करें और इस विषय पर नियमित फॉलोअप समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने दौसा जिला कलक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक, चिकित्सा विभाग एवं फायर सेफ्टी विभाग के अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घटना की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य, जिला अस्पताल में घायलों को उपलब्ध कराए गए उपचार तथा उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए।
जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को एक्सप्रेस-वे पर इंटरचेंज एवं निकास स्थलों से पर्याप्त दूरी पहले पृथक लेन विकसित करने तथा बड़े इलेक्ट्रॉनिक एवं ओवरहेड साइनेज स्थापित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने एक्सप्रेस-वे के ऐसे हिस्सों का तकनीकी सर्वे कर सड़क की सतह में मौजूद असमानताओं का समयबद्ध सुधार, चालक की सतर्कता बनाए रखने के लिए उपयुक्त स्थानों पर रम्बल स्ट्रिप्स विकसित करने, आपातकालीन कॉल बॉक्स की कार्यशीलता सुनिश्चित करने तथा पुलिस पेट्रोलिंग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। साथ ही ट्रक एवं बस चालकों की सुविधा के लिए पर्याप्त रेस्ट एरिया, किफायती भोजन और आवश्यक विश्राम सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री प्रवीण गुप्ता, गृह, गृह रक्षा एवं जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री भास्कर आत्माराम सावंत, परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री भवानी सिंह देथा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दौसा एक्सप्रेस-वे दुर्घटना की समीक्षा के बाद दिए गए निर्देश सड़क सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनजीवन की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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