डिजिटल लेनदेन में एक चूक पड़ सकती है भारी, साइबर जांच समेत कई कारणों से फ्रीज हो सकता है चालू खाता
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में व्यापारियों के चालू खाते केवल साइबर ठगी ही नहीं, बल्कि कई वैधानिक कारणों से भी फ्रीज हो सकते हैं। वेल्थोरा कम्प्लायंस हब के सीए लक्ष्मीकांत गुप्ता ने बताया कि किन परिस्थितियों में ऐसा होता है और इससे बचाव के लिए किन जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए।

तस्वीर में सीए लक्ष्मीकांत गुप्ता नीले रंग का ब्लेज़र पहने हुए दिखाई दे रहे हैं।
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ व्यापारियों के सामने एक नई चुनौती तेजी से उभरकर सामने आ रही है। देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जिनमें व्यापारियों के चालू खाते अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिए गए। कई मामलों में संबंधित व्यापारी किसी अपराध में सीधे शामिल नहीं होते, लेकिन संदिग्ध लेनदेन की श्रृंखला या अन्य वैधानिक कारणों के चलते उनका खाता जांच के दायरे में आ जाता है। ऐसी स्थिति में कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है और दैनिक कारोबार पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
वेल्थोरा कम्प्लायंस हब के सीए लक्ष्मीकांत गुप्ता के अनुसार, चालू खाता फ्रीज होने का कारण केवल साइबर ठगी से जुड़े मामले ही नहीं होते। न्यायालय अथवा जांच एजेंसियों के आदेश, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, धन शोधन संबंधी जांच, बैंक द्वारा नियामकीय अनुपालन, पहचान संबंधी अभिलेखों की कमी तथा अन्य वैधानिक कारणों से भी खाते के संचालन पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और उसी के अनुरूप उसका समाधान भी निर्धारित किया जाता है।
सीए लक्ष्मीकांत गुप्ता ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर ठगी की धनराशि को कई बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजते हैं। यदि जांच के दौरान किसी व्यापारी के खाते तक ऐसी धनराशि पहुंचने के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच पूरी होने तक खाते के संचालन पर रोक लग सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक खाताधारक अपराधी है, बल्कि जांच एजेंसियां धनराशि के पूरे प्रवाह की जांच करती हैं।
उन्होंने कहा कि किसी चालू खाते के फ्रीज होने का सबसे अधिक असर व्यापारियों की दैनिक व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ता है। कर्मचारियों के वेतन, माल के भुगतान, कर जमा करने सहित अन्य आवश्यक भुगतान प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए ऐसी स्थिति गंभीर आर्थिक कठिनाई का कारण बन सकती है।
सीए लक्ष्मीकांत गुप्ता ने व्यापारियों को सलाह दी कि नए ग्राहकों का पूरा सत्यापन अवश्य करें। ग्राहक का पैन संख्या, आधार संख्या, मोबाइल नंबर तथा ईमेल आईडी का सत्यापन करें। प्रत्येक लेनदेन से जुड़े बिल, आदेश पत्र, माल आपूर्ति के प्रमाण तथा बैंक अभिलेख सुरक्षित रखें। किसी भी अनजान व्यक्ति के लिए अपने बैंक खाते का उपयोग न होने दें। यदि कोई संदिग्ध भुगतान प्राप्त हो, तो तत्काल बैंक और संबंधित जांच एजेंसी को इसकी सूचना दें।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यापारी का खाता फ्रीज हो जाए तो घबराने के बजाय बैंक से लिखित जानकारी प्राप्त करें, संबंधित जांच एजेंसी के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें तथा नियमानुसार कार्यवाही करते हुए विधि विशेषज्ञ की सहायता लें।
सीए लक्ष्मीकांत गुप्ता के अनुसार, डिजिटल युग में सतर्कता, पारदर्शी लेनदेन, ग्राहकों का समुचित सत्यापन, सही अभिलेखों का रख-रखाव और समय पर कानूनी मार्गदर्शन ही ऐसे मामलों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। यही सावधानी व्यापारियों को अनावश्यक जांच, वित्तीय व्यवधान और कारोबारी जोखिमों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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