भरतपुर के प्रसिद्ध “अपना घर आश्रम” में मानव सेवा और संवेदना का अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला जब गंगापुर सिटी स्थित क्रिएटिव विद्यालय परिवार के लगभग 35 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने 13 जून को प्रेरणादायक भ्रमण किया। इस दौरान शिक्षकों ने आश्रम में निवासरत प्रभुजनों के बीच पहुंचकर उन्हें अपने हाथों से भोजन कराया और सेवा का भावपूर्ण अनुभव प्राप्त किया।

क्रिएटिव विद्यालय के प्रतिनिधि नीरज मिश्रा ने बताया कि यह भ्रमण केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं था, बल्कि मानव जीवन के वास्तविक मूल्यों को करीब से समझने और महसूस करने का एक भावनात्मक अवसर था। उन्होंने कहा कि अपना घर आश्रम किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है, जहां सेवा, समर्पण और अपनत्व की जीवंत मिसाल देखने को मिलती है।

भ्रमण के दौरान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने आश्रम की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया, जहां अत्याधुनिक ऑटोमेटिक किचन में प्रतिदिन लगभग 6500 से 7000 प्रभुजनों के लिए स्वच्छ, पौष्टिक एवं शुद्ध भोजन तैयार किया जाता है। इसके साथ ही आश्रम में स्वास्थ्य सेवाओं, आवास व्यवस्था, दैनिक आवश्यकताओं और मनोरंजन सुविधाओं की भी सुव्यवस्थित व्यवस्था मौजूद है।

आश्रम के थिएटर में प्रभुजनों को फिल्म का आनंद लेते देखना और उनके संघर्षपूर्ण जीवन की कहानियों को सुनना उपस्थित सभी के लिए अत्यंत भावुक अनुभव रहा। कठिन परिस्थितियों से गुजर चुके लोगों को आज सम्मान, सुरक्षा और अपनत्व के वातावरण में जीवन जीते देख शिक्षकों ने इसे प्रेरणादायक बताया।

इस अवसर पर क्रिएटिव विद्यालय परिवार ने आश्रम के सेवाभावी कर्मचारियों की कार्यशैली और समर्पण की सराहना की। प्रभुजनों द्वारा “राधे-राधे” और “नमस्ते” कहकर किया गया आत्मीय अभिवादन सभी के मन को छू गया। अंत में विद्यालय परिवार ने अपना घर आश्रम एवं डॉ. भारद्वाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अनुभव सेवा, संवेदना और मानवता की सच्ची पहचान को दर्शाता है, जो लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

Pratahkal Bureau

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