रणथम्भौर अभ्यारण्य के 1 किमी दायरे में डीजे–लाउडस्पीकर पर कलेक्टर की सख्त रोक, आदेश उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
रणथम्भौर अभ्यारण्य क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सवाई माधोपुर जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लेते हुए एक किलोमीटर परिधि में डीजे, लाउडस्पीकर और लेजर लाइट पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। आदेश उल्लंघन पर यंत्र जब्ती और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण पर काबू पाने की कोशिश की जाएगी।

सवाई माधोपुर, 14 नवम्बर। रणथम्भौर बाघ परियोजना की शांत वादियों में वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक आवास की पवित्रता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट काना राम द्वारा जारी आदेशों के बाद अभ्यारण्य क्षेत्र के एक किलोमीटर दायरे में डीजे और लाउडस्पीकर की तेज आवाजों पर पूरी तरह नकेल कस दी गई है, जिससे लंबे समय से बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण पर काबू पाया जा सके।
देश के प्रमुख बाघ अभ्यारण्यों में शामिल रणथम्भौर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं, वहीं इसके आसपास के गांवों व होटलों में होने वाले समारोहों में तेज ध्वनि विस्तारकों का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा था। प्रशासन के अनुसार यह शोर-शराबा साइलेंस जोन में निर्धारित 40 डीबी एल.ई.क्यू. मानक से कई गुना अधिक पाया गया, जिससे बाघों सहित दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। यही नहीं, यह शोर ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 तथा राजस्थान कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1963 के तहत स्पष्ट अपराध की श्रेणी में आता है।
जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 सहित संबंधित नियमों में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी ताज़ा आदेश में कहा गया है कि अभ्यारण्य क्षेत्र से 1 किलोमीटर की परिधि में स्थित होटल, रिसॉर्ट, मैरिज हॉल और अन्य प्रतिष्ठानों में रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का संचालन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। वहीं सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ध्वनि सीमा का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन ने परिधि क्षेत्र में बिना अनुमति लेजर लाइट शो आयोजित करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है।
आदेशों का उल्लंघन करने पर संबंधित साउंड सिस्टम, डीजे और ध्वनि यंत्रों को मौके पर ही जब्त किया जाएगा, जबकि संचालकों, होटल मालिकों और आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। जिला प्रशासन ने पुलिस विभाग और उपखंड अधिकारियों को इन आदेशों की सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस निर्णय से उम्मीद जताई जा रही है कि अभ्यारण्य की संवेदनशील पारिस्थितिकी को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा और वन्यजीवों को प्राकृतिक और शांत वातावरण पुनः मिल सकेगा।
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Pratahkal Bureau
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