जन्म-मृत्यु के विलंबित पंजीयन के नियम बदले, अब इन मामलों में मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण संशोधन अधिनियम, 2026 के तहत एक साल से अधिक पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।

राजस्थान सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग का कार्यालय सवाई माधोपुर, जहां जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीयन के नए संशोधित नियमों की पालना सुनिश्चित की जा रही है।
जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया में 1 अक्टूबर, 2026 से महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गया है। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधान प्रभावी होने के बाद एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक विलंबित जन्म अथवा मृत्यु के पंजीयन के लिए संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा।
सवाई माधोपुर, 5 अक्टूबर। जिला कलक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) काना राम ने जिले के संबंधित अधिकारियों एवं रजिस्ट्रारों को संशोधित प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार द्वारा अधिनियम में किए गए संशोधन के अनुसार ये प्रावधान 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हुए हैं।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष के पश्चात, लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी गई विलंबित सूचना का पंजीयन संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही किया जाएगा। आदेश जारी करने से पहले जन्म अथवा मृत्यु की घटना की शुद्धता का सत्यापन किया जाएगा और निर्धारित शुल्क भी देय होगा।
इसी प्रकार, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद दी गई सूचना का पंजीयन संबंधित क्षेत्राधिकार वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर ही किया जाएगा। इसके लिए भी घटना की शुद्धता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क का भुगतान आवश्यक होगा।
जिला कलक्टर काना राम ने बताया कि भारत सरकार द्वारा अधिनियम में किए गए संशोधन के अनुसार ये प्रावधान 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हैं। उन्होंने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में कार्यरत जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रारों को संशोधित प्रावधानों से अवगत कराने तथा 1 अक्टूबर के बाद इन प्रावधानों की अनिवार्य रूप से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिनियम के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में संशोधन किया गया है। केंद्र सरकार की अधिसूचना द्वारा 1 अक्टूबर, 2026 को संशोधित अधिनियम के प्रभावी होने की तिथि निर्धारित की गई है।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण करवाएं, ताकि भविष्य में विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया से बचा जा सके। संशोधित प्रावधानों के प्रभावी होने के साथ अब विलंबित पंजीयन के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित मजिस्ट्रेट के आदेश की भूमिका अनिवार्य हो गई है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
