स्थानीय दिगंबर जैन नसिंयाजी मंदिर में बुधवार को जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर 1008 भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में धर्मावलंबियों का आगमन प्रारंभ हो गया था तथा संपूर्ण वातावरण “जय जय शांतिनाथ” के जयकारों एवं भजनों से गुंजायमान हो उठा।

इस पावन अवसर पर परम पूज्य मुनिश्री 108 विलोक सागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 विभोर सागर जी महाराज ससंघ नसिंयाजी में विराजमान रहे। प्रातः बेला में जिनेंद्र भगवान के सामूहिक अभिषेक एवं पूजन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज ने कहा, “आज ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान असीम शांति अर्थात मोक्ष को प्राप्त हुए थे। जैन धर्म मोक्ष प्रधान धर्म है। यह धर्म हमें जीवन जीने की कला के साथ-साथ मृत्यु को महोत्सव बनाना भी सिखाता है। इसलिए हमें अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे पंचमहाव्रतों का पालन करते हुए ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे हमारा मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो सके।”

इसके पश्चात मुनिश्री के मुखारविंद से विश्व शांति की मंगल कामना के साथ शांति धारा संपन्न की गई। इस दौरान परम पूज्य मुनिश्री विलोक सागर जी द्वारा निर्वाण कांड का सस्वर पाठ किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से उपस्थित सैकड़ों धर्मावलंबी बंधुओं ने जिनेंद्र भगवान के समक्ष मोक्ष की कामना करते हुए निर्वाण लाडू चढ़ाया।

दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष प्रवीण जैन गंगवाल ने बताया कि आचार्य श्री 108 आर्जव सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विभोर सागर जी महाराज ससंघ वर्तमान में दिगंबर जैन नसिंयाजी मंदिर में चातुर्मास हेतु विराजमान हैं। उनके सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 6:30 बजे सामूहिक अभिषेक एवं शांति धारा तथा 8:00 बजे मंगल प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। इसी प्रकार सायंकाल भगवान की आरती के पश्चात शंका समाधान कार्यक्रम भी आयोजित हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में जैन बंधु भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। श्रद्धालुजन प्रतिदिन मुनि संघ की आहारचर्या एवं वैयावृत्ति कर पुण्यार्जन भी कर रहे हैं।

इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष, पदाधिकारीगण सहित अनेक गणमान्य सदस्य, महिलाएं एवं बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, अनुशासन एवं धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ, जिसने मोक्ष कल्याणक के आध्यात्मिक महत्व को और अधिक सशक्त रूप से स्थापित किया।

Pratahkal Bureau

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