हिंडौन सिटी में बसंत पंचमी की धूम: पीतांबर रंग में रंगे आराध्य, मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
हिंडौन सिटी में बसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हरदेव जी मंदिर और खाटू श्याम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में भगवान को पीली पोशाक धारण कराकर भव्य सजावट की गई। स्कूलों में मां सरस्वती की पूजा और हवन के साथ विद्यार्थियों को प्रसाद बांटा गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और धार्मिक आयोजनों से पूरा शहर भक्तिमय हो गया। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

हिंडौन सिटी। ऋतुराज बसंत के आगमन का उल्लास आज हिंडौन सिटी के कण-कण में जीवंत हो उठा। समूचा शहर 'पीले' रंग की आभा से सराबोर नजर आया, जहां मंदिरों की अलौकिक सजावट और शिक्षण संस्थानों में मां शारदे की वंदना ने एक आध्यात्मिक वातावरण निर्मित कर दिया। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के प्रमुख देवालयों में घंटों-घड़ियालों की गूंज सुनाई देने लगी, जो इस पावन पर्व के उत्साह को दोगुना कर रही थी।
नगर के हृदय स्थल में विराजे हरदेव जी मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, राधा रमन जी मंदिर, रघुनाथ जी मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर और केशोराय जी मंदिर में आज का दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था। बसंत पंचमी के विशेष अवसर पर भगवान को नई पीली पोशाक धारण कराई गई, जिसे देख भक्त भाव-विभोर हो उठे। मंदिरों के गर्भगृह को फूलों और रंगीन रोशनी से भव्य रूप में सजाया गया था। दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जो अपने आराध्य की एक झलक पाने और पीत पुष्प अर्पित करने के लिए आतुर दिखी। पुजारियों द्वारा भगवान को पीले व्यंजनों का विशेष भोग लगाया गया, जिसे बाद में भक्तों में वितरित किया गया।
आध्यात्मिक उल्लास के साथ-साथ आज ज्ञान की देवी मां सरस्वती का पूजन भी पूरे विधि-विधान से किया गया। हिंडौन सिटी के विभिन्न स्कूलों में बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी पीले वस्त्रों में सजे-धजे नजर आए। कई विद्यालयों में हवन का आयोजन किया गया, जहां मंत्रोच्चार के बीच शिक्षा और बुद्धि की कामना की गई। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया गया और प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ।
बसंत पंचमी का यह पर्व केवल एक तिथि विशेष नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के मिलन का प्रतीक बनकर उभरा। हिंडौन सिटी की गलियों से लेकर मंदिरों की चौखट तक फैला यह पीला रंग नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार कर गया। भारी संख्या में उमड़ी भीड़ और सामूहिक भक्ति भाव ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी परंपराओं की जड़ें शहर में अत्यंत गहरी हैं।

Pratahkal Bureau
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