एफएफएस में ‘Add Land’ से खाद वितरण पर सवाल, जमीन किसी की और खाद किसी और के नाम?
बरनाला में एफएफएस के ‘Add Land’ विकल्प, खाद उठाव और 48 घंटे की बुकिंग प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं, जांच की मांग उठी।

रबी सीजन में बुवाई का समय नजदीक आते ही डीएपी, यूरिया सहित अन्य उर्वरकों की जरूरत बढ़ गई है। सरकार ने खाद वितरण में पारदर्शिता के लिए एफएफएस ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की है, लेकिन बरनाला से सामने आई शिकायतों ने इस व्यवस्था में भूमि जोड़ने से लेकर खाद उठाने तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ‘Add Land’ विकल्प के जरिए किसी किसान की जमीन और खाता संख्या दूसरे किसान की एफएफएस आईडी में जुड़ने की स्थिति बन सकती है। वहीं, 30 से 50 कट्टे तक खाद उठाने की शिकायतों की भी जांच की मांग की गई है।
बरनाला सेवा सहकारी समिति की सदस्य एवं एडवोकेट मंजू कुमारी मीना ने एफएफएस व्यवस्था को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एफएफएस आईडी में किसी दूसरे किसान की जमीन या खाता संख्या जुड़ जाती है तो इसका सीधा असर उस किसान पर पड़ सकता है, जिसके नाम वास्तव में जमीन दर्ज है। ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड और एफएफएस रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
एडवोकेट मीना के अनुसार एफएफएस में ‘Add Land’ विकल्प के जरिए भूमि जोड़ने के दौरान दूसरे किसान की भूमि एवं खाता संख्या जुड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ऑनलाइन सिस्टम में जमीन जोड़ते समय पर्याप्त सत्यापन नहीं होने पर वास्तविक खातेदार किसान अपने हक की खाद से वंचित हो सकता है।
उन्होंने मांग की है कि जिन खातों में हाल ही में भूमि जोड़ी गई है, उनका राजस्व रिकॉर्ड से सत्यापन कराया जाए। साथ ही ऐसे मामलों की भी जांच हो, जिनमें एक किसान की भूमि का विवरण किसी दूसरे व्यक्ति की एफएफएस आईडी में दिखाई दे रहा है।
मामला उस समय और गंभीर हो जाता है, जब कुछ मामलों में 50 कट्टे तक खाद उठाए जाने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि खाद किस भूमि के आधार पर, किसके नाम और किस रिकॉर्ड के आधार पर जारी हुई।
एडवोकेट मीना ने मांग की है कि एफएफएस बुकिंग रिकॉर्ड, भूमि रिकॉर्ड और सहकारी समिति से जारी खाद के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। उनके अनुसार रिकॉर्ड का मिलान होने से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं हो रही है। कई किसान मोबाइल पर बुकिंग करने के बाद खाद लेने के लिए समिति पहुंच रहे हैं। वहां उन्हें स्टॉक की स्थिति, वितरण की बारी या खाद उपलब्ध होने की जानकारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि खेती के व्यस्त समय में खाद के लिए बार-बार समिति तक जाना अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रहा है। एक ओर खेत में बुवाई का समय निकल रहा है, वहीं दूसरी ओर खाद के लिए लाइन और इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों की मांग है कि बुकिंग के बाद खाद उपलब्ध होने की स्थिति की जानकारी उन्हें स्पष्ट रूप से मिले, ताकि उन्हें बेवजह समिति के चक्कर न लगाने पड़ें।
एफएफएस की 48 घंटे वाली प्रक्रिया को लेकर भी किसानों में भ्रम की स्थिति की बात सामने आई है। एडवोकेट मंजू कुमारी मीना के अनुसार निर्धारित 48 घंटे में खाद नहीं उठाने पर बुकिंग ऑटोमेटिक कैंसिल होकर संबंधित स्टॉक में वापस चली जाती है और उपलब्ध स्टॉक को किसान दोबारा बुक कर सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में ग्राम सेवा सहकारी समिति के सचिव की कोई भूमिका नहीं होती। इसलिए बुकिंग कैंसिल होने या स्टॉक में वापस जाने को लेकर किसानों को किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। कृषि विभाग को इस प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने की मांग की गई है।
खाद वितरण में समितियों के सर्किल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि दूसरे गांव या क्षेत्र के किसान किसी समिति में खाद लेने पहुंचते हैं तो स्थानीय किसानों के साथ प्राथमिकता को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। एडवोकेट मीना ने मांग की है कि हर समिति का सर्किल स्पष्ट किया जाए और संबंधित सर्किल के किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उनका कहना है कि व्यवस्था स्पष्ट होने से किसान आपसी विवाद से बच सकेंगे और समिति के कर्मचारियों पर भी अनावश्यक दबाव नहीं बनेगा।
रबी सीजन में किसान के लिए एक-एक दिन महत्वपूर्ण है। ऐसे में खाद के लिए घंटों इंतजार या बार-बार समिति के चक्कर लगाने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है। किसानों की मांग है कि स्टॉक की वास्तविक स्थिति, बुकिंग और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। यदि स्टॉक उपलब्ध है तो पात्र किसान को समय पर खाद मिले और यदि स्टॉक नहीं है तो इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने रबी सीजन में उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण की निगरानी के लिए जिला स्तरीय उर्वरक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। यहां किसानों की शिकायतें दर्ज कर संबंधित अधिकारियों से समन्वय के माध्यम से समाधान कराने की व्यवस्था है।
ऐसे में एफएफएस को लेकर उठ रही शिकायतें अब नियंत्रण कक्ष और कृषि विभाग के लिए भी परीक्षा बन गई हैं। किसानों को उम्मीद है कि शिकायतों की केवल सुनवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एफएफएस रिकॉर्ड, राजस्व रिकॉर्ड और खाद वितरण रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी।
एडवोकेट मंजू कुमारी मीना ने कहा कि व्यवस्था का फायदा वास्तविक किसान को मिलना चाहिए। न किसी की जमीन गलत तरीके से किसी दूसरे की आईडी में जुड़नी चाहिए और न ही पात्र किसान खाद के लिए परेशान होना चाहिए।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
