हिंडौन सिटी। शहर के मोहन नगर में बीती रात आयोजित भव्य भजन संध्या श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं के संगम में बदल गई, जब राष्ट्रीय बाल भजन गायिका शक्ति दुबे ने बाबा श्याम के दरबार में अपनी सुमधुर प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जैसे ही भजनों की सरिता प्रवाहित हुई, पूरा वातावरण जयकारों और भक्ति रस में सराबोर हो उठा।

कार्यक्रम के दौरान 17 वर्षीय शक्ति दुबे ने न केवल अपने लोकप्रिय भजनों से श्रोताओं को बांधा, बल्कि अपने संघर्ष और साधना से भरे जीवन सफर को भी साझा किया। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मी शक्ति दुबे ने बताया कि उनके पिता ओमप्रकाश दुबे किसान हैं और परिवार में दो भाई-बहन हैं। वर्तमान में वे कक्षा 12वीं की छात्रा हैं और शिक्षा के साथ संगीत साधना को समान महत्व दे रही हैं।

शक्ति दुबे ने बताया कि भजन गायन की ओर उनका झुकाव महज 11 वर्ष की उम्र में हुआ। घर के धार्मिक माहौल ने उनके मन में भक्ति संगीत के बीज बोए, जो समय के साथ गहन साधना में परिवर्तित हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी बड़े मंचों की कल्पना नहीं की थी, लेकिन भक्ति और ईश्वर में अटूट विश्वास ने उन्हें वह मार्ग दिखाया, जिससे आज वे देशभर में पहचानी जा रही हैं। संघर्ष के दौर में परिवार का सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा।

अपने गायन को शास्त्रीय आधार देने के उद्देश्य से शक्ति वर्तमान में छत्तीसगढ़ के इन्द्रकला संगीत विश्वविद्यालय से संगीत में डिप्लोमा कर रही हैं। उनका मानना है कि भक्ति के साथ संगीत की गहरी समझ आवश्यक है, तभी भाव सही रूप में श्रोताओं तक पहुंच पाते हैं। पढ़ाई और मंचीय कार्यक्रमों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए एक निरंतर साधना है।

शक्ति दुबे की राष्ट्रीय पहचान बाबा बागेश्वरधाम से जुड़े आयोजनों के माध्यम से बनी। उन्होंने धाम के जन्मोत्सव और प्रवचनों में भजन गायन का अवसर मिलने को अपने जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उनका चर्चित भजन “बागेश्वर धाम का डंका” देशभर में लोकप्रिय हुआ, जिसके बाद वे बागेश्वर धाम सरकार की भजन गायिका के रूप में जानी जाने लगीं। उनकी प्रस्तुतियों में बागेश्वर धाम से जुड़े भक्ति गीतों और बुंदेली लोकगीतों का विशेष स्थान है, जिन्हें श्रोताओं का अपार प्रेम मिलता है।

मोहन नगर की इस भजन संध्या ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची भक्ति और समर्पण सीमित संसाधनों से निकलकर भी राष्ट्रीय पहचान बना सकता है। शक्ति दुबे की प्रस्तुति श्रद्धालुओं के लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था और प्रेरणा का जीवंत अनुभव बनकर स्मृतियों में दर्ज हो गई।

Pratahkal Bureau

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