सवाई माधोपुर, 1 दिसम्बर: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विश्व एड्स दिवस के अवसर पर सोमवार को जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया। रैली की शुरुआत मानवेन्द्र प्रताप शुक्ल ने हरी झंडी दिखाकर की। एएनएएम ट्रेनिंग सेंटर की छात्राओं ने जिला अस्पताल से विनोबा बस्ती तक रैली निकालते हुए नारे लगाकर आमजन को एड्स और एचआईवी संक्रमण के प्रति जागरूक किया।

इस अवसर पर उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अधिकारियों ने एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। डॉ. देशराज, डॉ. अंजनी माथुरिया, काउन्सलर मधु चौधरी, नरेन्द्र शर्मा और हेमलता शर्मा ने रैली में भाग लेकर इस महत्वपूर्ण अभियान का समर्थन किया।

एड्स, जिसे एचआईवी वायरस के कारण होने वाला रोग माना जाता है, वर्तमान में लाइलाज बीमारी है। एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है और समय के साथ यह एड्स में परिवर्तित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

विश्व एड्स दिवस की शुरुआत 1987 में हुई थी। इसका उद्देश्य लोगों को इस गंभीर बीमारी के कारणों, संक्रमण और प्रभाव के बारे में जानकारी देना है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर जागरूकता फैलाने के माध्यम से एचआईवी और एड्स संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। इस वर्ष का एड्स दिवस का थीम है "Overcoming disruption: transforming the AIDS response", जिसका अर्थ है ‘बाधाओं पर विजय और एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन’।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस रैली ने न केवल स्थानीय नागरिकों में एड्स के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई, बल्कि समुदाय में जागरूकता के महत्व को भी उजागर किया। विशेषज्ञों ने इस अवसर पर कहा कि जन-जागरूकता कार्यक्रम और शिक्षा से ही इस महामारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

Pratahkal Bureau

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