रीति में राज्यस्तरीय समीक्षा कार्यशाला संपन्न, आकांक्षी जिलों-ब्लॉकों के संकेतकों के सेचुरेशन पर बना विस्तृत रोडमैप
जयपुर स्थित रीति में आयोजित राज्यस्तरीय समीक्षा कार्यशाला में आकांक्षी जिला कार्यक्रम, आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम और गुरु गोलवलकर आकांक्षी ब्लॉक विकास योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। विभागों ने संकेतकों के सेचुरेशन, सटीक डेटा रिपोर्टिंग, संसाधनों के उपयोग और अंतर-विभागीय समन्वय पर विस्तृत रणनीति साझा की।

तस्वीर में योजना भवन में आयोजित आकांक्षी जिला और ब्लॉक कार्यक्रम की समीक्षा कार्यशाला में बैठक के दौरान बैठे हुए अधिकारी नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 5 अगस्त। आकांक्षी जिला कार्यक्रम, आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम तथा गुरु गोलवलकर आकांक्षी ब्लॉक विकास योजना के अंतर्गत चयनित जिलों और ब्लॉकों में आमजन के जीवन स्तर में सुधार के लिए संकेतकों के सेचुरेशन पर केंद्रित एक दिवसीय राज्यस्तरीय समीक्षा कार्यशाला का आयोजन बुधवार को योजना भवन स्थित राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव ट्रांसफॉर्मेशन (रीति) में किया गया। कार्यशाला में उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम, प्रभावी और पारदर्शी उपयोग, मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा सटीक डेटा रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही विभिन्न विभागों, जिलों और ब्लॉकों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर संकेतकों की प्रगति को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यशाला में विभागीय योजनाओं एवं सूचकांकों के सेचुरेशन के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय प्रक्रिया का गहन ऑडिट कर ठोस एक्शन प्लान तैयार करने की आवश्यकता बताई गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिलों और ब्लॉकों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए कार्यों का क्रियान्वयन किया जाए तथा वास्तविक और संभावित लाभार्थियों की सटीक मैपिंग कर मॉनिटरिंग सिस्टम को सुदृढ़ बनाया जाए। उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक लाभार्थी और प्रत्येक सूचकांक के स्तर पर माइक्रो लेवल रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विभागों की उपलब्धियों को बढ़ाने के लिए कार्ययोजना पर विचार करना, स्वास्थ्य, पशुपालन, शिक्षा एवं कौशल विभागों की बेस्ट प्रैक्टिस से सीख लेना तथा अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना रहा।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, पूर्ण टीकाकरण, संस्थागत प्रसव तथा पीसीटीएस पोर्टल पर उच्च गुणवत्ता वाली डेटा एंट्री और सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों की जानकारी दी। विभाग ने आईसीडीएस के पोषण ट्रेकर के साथ प्रभावी कन्वर्जेंस, वास्तविक लाभार्थियों की सटीक मैपिंग, डेनॉमिनेटर के शुद्ध निर्धारण, एमसीएच सेवाओं के ड्रिल-डाउन विश्लेषण तथा ब्लॉक स्तर पर नियमित डेटा ऑडिट के माध्यम से सूचकांकों के सेचुरेशन की दिशा में तैयार कार्ययोजना प्रस्तुत की। साथ ही प्रत्येक सूचकांक के लिए एक्शन प्लान तैयार करने, रिपोर्टिंग के साथ वास्तविक लाभार्थी कवरेज सुनिश्चित करने तथा फील्ड-स्तरीय सत्यापन आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा की गई।
शिक्षा विभाग ने पीएम श्री, निपुन राजस्थान, ओरल रीडिंग फ्लूएंसी, शाला सम्बलन, बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय उपलब्धता तथा विद्यालय स्तर पर माइक्रो प्लानिंग से जुड़ी पहलों की प्रगति साझा की। विभाग ने विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात में सुधार, आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान एवं पुनः नामांकन, बुनियादी भाषा और गणित विषयों में दक्षता बढ़ाने तथा प्रत्येक विद्यालय के लिए सूचकांक आधारित कार्ययोजना पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। शिक्षा संबंधी प्रत्येक सूचकांक का विद्यालय स्तर तक माइक्रो लेवल विश्लेषण, योजनाओं की प्रभावशीलता, वास्तविक प्रगति की प्रभावी मॉनिटरिंग तथा अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से सेचुरेशन हासिल करने की दिशा में कार्य करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
कौशल विकास एवं रोजगार निदेशालय, राजस्थान राज्य आजीविका एवं कौशल विकास निगम तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों ने कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं की दक्षता बढ़ाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने प्रधानमंत्री जनधन योजना, सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना तथा अटल पेंशन योजना का सेचुरेशन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने बताया कि भारतनेट परियोजना के अंतर्गत 8 हजार 500 से अधिक ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। साथ ही अमेंडेड भारतनेट प्रोग्राम के तहत शेष ग्राम पंचायतों एवं सरकारी भवनों को एफटीटीएच कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।
ग्रामीण विकास विभाग ने ग्राम पंचायत विकास योजना के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आंगनवाड़ी विकास कार्यों के प्रभावी अभिसरण पर जोर दिया, ताकि स्थानीय बजट और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग आकांक्षी ब्लॉकों के समग्र विकास में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके। कार्यशाला का निष्कर्ष इस बात पर केंद्रित रहा कि विभागीय समन्वय, सटीक डेटा रिपोर्टिंग, माइक्रो लेवल रणनीति और संसाधनों के पारदर्शी उपयोग के माध्यम से आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में निर्धारित संकेतकों का सेचुरेशन सुनिश्चित किया जाए।

