करौली/प्रयागराज। संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए विदुषी, साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ. आशा मीना को भारतवर्ष की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज (इलाहाबाद) द्वारा ‘संस्कृत महामहोपाध्याय’ मानद उपाधि से विभूषित किया गया है। प्रयागराज में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। यह उपाधि संस्कृत और हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रपति सम्मान तथा डी. लिट्. के समकक्ष मानी जाती है।

डॉ. आशा मीना मूल रूप से करौली जिले की नादौती तहसील के ग्राम कैमा निवासी स्वर्गीय रामजीलाल मीना एवं स्वर्गीय विशिनी मीना की पुत्रवधू हैं। उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर नादौती क्षेत्र सहित समूचे करौली जिले में हर्ष की लहर है। वर्तमान में डॉ. आशा मीना दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वे विद्यार्थियों को रामायण, महाभारत एवं पुराण साहित्य का अध्यापन करा रही हैं।

उनकी शैक्षणिक यात्रा अत्यंत मेधावी रही है। उन्होंने माध्यमिक से लेकर आचार्य स्तर तक की सभी परीक्षाएं संस्कृत विषय में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कीं। वर्ष 1999 और 2000 में लगातार दो बार यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात, उन्होंने वर्ष 2006 में ‘‘श्रीमद्भागवत पुराण में जीवन-दर्शन’’ विषय पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपने शिक्षण करियर की शुरुआत करने के बाद, मार्च 2025 में उनका चयन दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुआ। उनके कुशल निर्देशन में अब तक सात शोधार्थी पीएचडी पूर्ण कर चुके हैं, जबकि छह अन्य शोधार्थी वर्तमान में कार्यरत हैं।

डॉ. मीना का साहित्यिक अवदान भी अत्यंत व्यापक है। जयपुर एवं दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रकाशकों द्वारा उनकी 11 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने देशभर में 20 अंतरराष्ट्रीय एवं 40 राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं। यूजीसी मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और विभिन्न विद्वानों के अभिनंदन ग्रंथों में उनके 40 शोध-पत्र एवं 10 शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। वे ‘व्यासश्री’, ‘चिंतन’ एवं ‘प्रमाण’ जैसी यूजीसी-केयर सूचीबद्ध शोध पत्रिकाओं के संपादक एवं परामर्श मंडल की सदस्य भी हैं।

संस्कृत सेवा के लिए उन्हें पूर्व में वर्ष 2008 में ‘भवभूति अलंकरण सम्मान’ तथा वर्ष 2018 में ‘साहित्य सम्मान’ मिल चुका है। उल्लेखनीय है कि उनके पति डॉ. बाबूलाल मीना भी दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. आशा मीना की इस उपलब्धि को क्षेत्र के शिक्षाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने करौली, नादौती और राजस्थान के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताते हुए उन्हें बधाई प्रेषित की है।

Pratahkal Newsroom

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