सवाई माधोपुर के अमावरा में रबी फसलों की बुवाई से पहले कृषक गोष्ठी, किसानों को बताई उन्नत खेती की तकनीक
सवाई माधोपुर के अमावरा में आत्मा योजना के तहत रबी पूर्व कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। किसानों को सरसों, चना और गेहूं की वैज्ञानिक खेती, डीएपी के विकल्प एसएसपी, मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और प्रमाणित कृषि सामग्री खरीदने की जानकारी दी गई।

सवाई माधोपुर के अमावरा गांव में आत्मा योजना के तहत आयोजित कृषक गोष्ठी में उपस्थित किसान और कृषि अधिकारी।
सवाई माधोपुर जिले के अमावरा गांव में रबी फसलों की बुवाई से पहले कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें किसानों को सरसों, चना और गेहूं की वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, बीजोपचार, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण की जानकारी दी गई। साथ ही डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग तथा खाद, बीज और कीटनाशक खरीदते समय सावधानियां बरतने की सलाह दी गई।
गोष्ठी में सहायक निदेशक कृषि सियाराम मीना ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से उनका लाभ लेने और नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने खेती में अनावश्यक लागत कम करने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया।
सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी ने सरसों, चना और गेहूं की वैज्ञानिक खेती के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रबी फसलों से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित उर्वरकों का उपयोग और फसल की शुरुआती अवस्था में उचित देखभाल महत्वपूर्ण है।
उन्होंने किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसएसपी से फसलों को फास्फोरस के साथ सल्फर भी मिलता है। सल्फर विशेष रूप से सरसों जैसी तिलहनी फसलों के लिए उपयोगी पोषक तत्व है। डीएपी के स्थान पर एसएसपी का उपयोग करते समय फसल की आवश्यकता के अनुसार फास्फोरस की समतुल्य मात्रा सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि फसल को नाइट्रोजन की आवश्यकता हो, तो उसकी पूर्ति यूरिया या अन्य उपयुक्त स्रोत से संतुलित मात्रा में अलग से करनी चाहिए। उर्वरकों का चयन मिट्टी परीक्षण और कृषि विभाग की अनुशंसाओं के आधार पर करने की सलाह भी दी गई।
फसलवार तकनीकी जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि सरसों की बुवाई क्षेत्र और किस्म के अनुसार समय पर करनी चाहिए। फसल में संतुलित उर्वरकों के उपयोग के साथ सल्फर की आवश्यकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण और नियमित फसल निरीक्षण से उत्पादन में सुधार किया जा सकता है।
चना की खेती के संबंध में किसानों को बीजोपचार के बाद बुवाई करने की सलाह दी गई। दलहनी फसल होने के कारण चने में राइजोबियम कल्चर और अनुशंसित फॉस्फोरस प्रबंधन पर ध्यान देने को कहा गया। साथ ही खेत में जलभराव से बचने और फसल में रोगों एवं कीटों की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता बताई गई।
गेहूं की खेती के लिए क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन कर समय पर बुवाई करने पर जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि बीज दर, कतार से कतार की दूरी और उर्वरकों की मात्रा का निर्धारण बुवाई की विधि, किस्म तथा मिट्टी की स्थिति के अनुसार करना चाहिए। फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में आवश्यकता के अनुरूप सिंचाई करने की सलाह भी दी गई।
किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज खरीदने तथा बुवाई से पहले बीजोपचार करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही बिना आवश्यकता के उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई। फसल में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर पहले उनकी सही पहचान करने और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही अनुशंसित दवा का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
सहायक कृषि अधिकारी सुमित भारद्वाज ने खाद, बीज और कीटनाशक दवाइयां अधिकृत विक्रेताओं से उचित दर पर खरीदने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खरीद पर पक्का बिल अवश्य लेना चाहिए और बिल में उत्पाद का नाम, मात्रा तथा मूल्य की जांच करनी चाहिए। किसानों को बिना बिल कृषि सामग्री खरीदने, अनावश्यक उत्पाद लेने और जबरन टैगिंग के प्रति भी सतर्क किया गया।
कृषि पर्यवेक्षक शिवकेश ने किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और अन्य उपयोगी कृषि गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में संबंधित कृषि कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर समय पर आवेदन करने का आग्रह किया।
गोष्ठी में मिट्टी परीक्षण और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के माध्यम से खेती की लागत कम करने पर भी जोर दिया गया। किसानों को बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच करवाकर पोषक तत्वों की स्थिति के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई। इससे अनावश्यक खाद खर्च कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा किसानों को फसल चक्र अपनाने, खेत में उपलब्ध नमी का समुचित उपयोग करने और कृषि आदानों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया।
कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत आयोजित इस कृषक गोष्ठी का उद्देश्य रबी सीजन की शुरुआत से पहले किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी देना, कृषि लागत कम करने के उपाय बताना, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देना और विभागीय योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
