राजस्थान के शिक्षा विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया जब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं के ऐन वक्त पर बिना किसी आवेदन के हजारों शिक्षकों के तबादले कर दिए गए। इसे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ और सरकार की वादाखिलाफी करार देते हुए राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शिक्षा मंत्री की कथित उदासीनता और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर आगामी एक फरवरी को उनके ही विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में एक विशाल सांकेतिक शिक्षक रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए कोटा के पाठक स्वीट्स होटल में संभाग स्तरीय पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक और संवाददाता सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के शिक्षक नेताओं ने हुंकार भरी।

बैठक के दौरान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह राठौड़ और कोटा जिलाध्यक्ष हरि ओम प्रजापति ने कड़े शब्दों में कहा कि शिक्षा विभाग के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है कि जब छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं, तब बिना मांगे ही प्रधानाचार्यों, उप प्रधानाचार्यों और व्याख्याताओं को इधर-उधर भेज दिया गया। वक्ताओं ने इसे छात्र हितों के साथ घोर अन्याय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि संगठन लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रख रहा है, लेकिन शासन द्वारा केवल आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 29 अगस्त 2025 को शिक्षा सचिव के साथ हुई उच्च स्तरीय वार्ता के निर्णयों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिससे प्रदेश के शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है।

इस आंदोलन की मुख्य मांगों में एक पारदर्शी और स्थाई स्थानांतरण नीति लागू करना शामिल है, ताकि तृतीय श्रेणी शिक्षकों सहित सभी संवर्गों को न्याय मिल सके। साथ ही, अतिरिक्त विषय के साथ स्नातक करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी करने, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने और पीईईओ व यूसीईईओ को अतिरिक्त स्टॉफ व 10 प्रतिशत हार्ड ड्यूटी भत्ता देने जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गई हैं। संगठन ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता समाप्त करने और प्रबोधकों की वेतन विसंगति दूर करने की भी पुरजोर वकालत की है।

बैठक में मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल मीणा, महामंत्री नवीन शर्मा, और संघर्ष समिति के संयोजक उम्मेद सिंह डूडी ने संयुक्त रूप से आगामी रैली को सफल बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर मोहन लाल धाकड़, राज सिंह, मुकेश कुमार गौतम, राजेन्द्र पारीक, नारायण प्रसाद मिश्रा, हनुमान प्रसाद बैरवा, घनश्याम अटल, रमेश चन्द्र मीणा, मंजु डोरिया, राम सिंह मीणा, रेणु सोनी, पवन कुमार, भूरालाल बंजारा, कैलाश गौड़, अशोक नागर, तुलसीराम वर्मा और भूपेश राठौड़ सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। रामगंजमंडी की यह रैली न केवल शिक्षा मंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, बल्कि यह राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के मान-सम्मान और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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