सवाई माधोपुर में सम्पन्न हुई “सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षण” पर तीन दिवसीय कार्यशाला — शिक्षा में करुणा और संवेदनशीलता की दिशा में एक सशक्त पहल
सवाई माधोपुर के डाइट संस्थान में “सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षण (सी लर्निंग)” पर तीन दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। 40 शिक्षकों की भागीदारी वाले इस प्रशिक्षण में करुणा, आत्म-जागरूकता और सहानुभूति पर केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा में संवेदनशीलता और नैतिकता की नई दिशा प्रस्तुत की गई।

सवाई माधोपुर, 13 नवम्बर। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि भावनात्मक सशक्तिकरण और नैतिक मूल्यों के विकास की आधारशिला भी है। इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) सवाई माधोपुर के डीआरयू प्रभाग के तत्वावधान में “सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षण (सी लर्निंग)” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
डीआरयू प्रभाग प्रभारी राजेश कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में सम्पन्न इस कार्यशाला में जिले के सभी ब्लॉकों से आए 40 शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को सी लर्निंग के सिद्धांतों, दृष्टिकोण और उसके व्यवहारिक प्रयोगों से परिचित कराना था, ताकि वे अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को प्रोत्साहित कर सकें।
कार्यशाला का संचालन संदर्भ व्यक्ति (एमटी) रामहेत मीणा और पीरामल फाउंडेशन जयपुर के वरिष्ठ कार्यक्रम लीडर मोहम्मद खुलूस खान द्वारा किया गया। दोनों प्रशिक्षकों ने अपने अनुभव और संवादात्मक शैली से सत्रों को प्रेरणादायी रूप दिया। उन्होंने बताया कि सी लर्निंग केवल एक शिक्षण तकनीक नहीं, बल्कि एक ऐसा दृष्टिकोण है जो विद्यालयों में करुणा, संवेदनशीलता और आत्म-जागरूकता की संस्कृति स्थापित करता है।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने ‘खुशियों का पिटारा’, ‘रेज़िलिएंस ज़ोन’, ‘ग्रैटिट्यूड बॉक्स’ और ‘इमोशन व्हील’ जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से आत्म-चिंतन, सहानुभूति और नैतिक निर्णय क्षमता को अनुभवात्मक रूप से सीखा। इन गतिविधियों ने उन्हें यह समझने में मदद की कि विद्यालयीन वातावरण में बच्चों की भावनात्मक आवश्यकताओं को कैसे समझा और संवेदनशीलता से संबोधित किया जा सकता है।
प्रतिभागी शिक्षकों ने इस कार्यशाला को अपने आत्म-विकास की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण उन्हें न केवल विद्यार्थियों से बेहतर संबंध बनाने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि स्वयं को एक करुणामय और सजग शिक्षक के रूप में विकसित करने का अवसर भी देता है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि वे सी लर्निंग के सिद्धांतों को अपने विद्यालयों में लागू करेंगे, ताकि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न होकर नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवता के मूल्यों से युक्त हो।
यह तीन दिवसीय कार्यशाला शिक्षा प्रणाली में करुणा, सहानुभूति और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्थापन की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुई।
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Pratahkal Bureau
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