रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण का नया अध्याय : पालीघाट में 30 घड़ियाल हैचलिंग्स का प्राकृतिक आवास में पुनर्वास गुरुवार को
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के अंतर्गत पालीघाट में गुरुवार को 30 घड़ियाल हैचलिंग्स को चम्बल नदी में प्राकृतिक आवास में पुनर्वासित किया जाएगा। वन मंत्री संजय शर्मा की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

सवाई माधोपुर, 12 नवम्बर।
राजस्थान के रणथम्भौर वन्यजीव परिक्षेत्र में वन संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। चम्बल नदी के पवित्र तट पालीघाट में गुरुवार को 30 घड़ियाल हैचलिंग्स को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वासित किया जाएगा। यह पहल न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और वे स्वयं इन घड़ियालों को चम्बल नदी में छोड़कर इस नव अध्याय की शुरुआत करेंगे। यह कार्यक्रम घड़ियाल रेयरिंग फास्ट ट्रैक–हेड स्टार्टिंग कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जो लुप्तप्राय घड़ियाल प्रजाति के संरक्षण हेतु राज्य सरकार की दूरदर्शी पहल है।
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राजस्थान सरकार जयपुर सुश्री शिखा मेहरा, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) राजेश गुप्ता तथा जिला कलक्टर सवाई माधोपुर काना राम भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
उप वन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक (प्रथम), रणथम्भौर बाघ परियोजना डॉ. रामानंद भाकर ने बताया कि जुलाई 2025 में स्थापित पालीघाट रियरिंग सेंटर में इन 30 घड़ियाल हैचलिंग्स को वैज्ञानिक पद्धति से पाला गया है। अब पांच माह की आयु पूर्ण करने के बाद इन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जा रहा है ताकि वे स्वाभाविक पारिस्थितिकी तंत्र में समायोजित होकर विकसित हो सकें।
इस पहल को राज्य की घड़ियाल संरक्षण योजना में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घड़ियालों के पुनर्वास से चम्बल नदी क्षेत्र में इस प्रजाति की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और उनका आवासीय संरक्षण और भी सुदृढ़ होगा।
वन विभाग का यह प्रयास न केवल जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब वैज्ञानिक प्रयास, नीतिगत सहयोग और प्रशासनिक इच्छाशक्ति एक साथ आते हैं, तो प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में अद्भुत परिणाम सामने आते हैं।
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Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
