सलूम्बर। ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के स्वरूप और नाम में संभावित बदलाव की आहट ने अब सियासी गलियारों में उबाल पैदा कर दिया है। रविवार को सलूम्बर जिला मुख्यालय पर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए एक अनूठा और पुरजोर विरोध प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिशा-निर्देशों पर आयोजित 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौन रहकर अपनी आवाज बुलंद की।

आंदोलन का आगाज जिला मुख्यालय स्थित कांग्रेस भवन से हुआ, जहां से पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर शहर के हृदय स्थल गांधी चौक पहुंचे। दोपहर ठीक 1 बजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के चरणों में बैठकर कांग्रेसियों ने सामूहिक मौन उपवास शुरू किया, जो शाम 4 बजे तक अनवरत जारी रहा। शहीद स्मारक की साक्षी में आयोजित इस लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने केंद्र सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि गरीबों के हक की इस योजना के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस मौन सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे जिला कांग्रेस अध्यक्ष परमानंद मेहता एडवोकेट ने उपवास के पश्चात सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि देश के करोड़ों गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा है। मेहता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार योजना का नाम बदलने और इसके मूल स्वरूप को खंडित करने का प्रयास कर रही है, जो सीधे तौर पर गरीबों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी कदम के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी और मजदूरों की आजीविका पर आंच नहीं आने देगी।

प्रदर्शन के दौरान स्थानीय नेताओं ने केंद्र की नीतियों को 'गरीब विरोधी' करार देते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने वाली इस योजना को कमजोर करना ग्रामीण भारत की बुनियाद को हिलाने जैसा है। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे की व्यापक एकजुटता देखने को मिली। कार्यक्रम में नगर परिषद सभापति, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष, वर्तमान एवं पूर्व नगर अध्यक्ष, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष, एनएसयूआई जिला अध्यक्ष सहित अग्रिम संगठनों के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे। साथ ही सभी मंडल अध्यक्षों, जिला व ब्लॉक कार्यकारिणी के सदस्यों और समर्पित कार्यकर्ताओं ने इस तीन घंटे के उपवास में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आंदोलन को धार दी।

लोकतंत्र के इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने सलूम्बर के राजनीतिक वातावरण में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस का यह 'मौन' आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की आहट माना जा रहा है, जो ग्रामीण जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्पित दिखाई देता है।

Pratahkal Bureau

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