यूरिया की कालाबाजारी पर उदयपुर संभाग में कड़ी कार्रवाई, 9 लाइसेंस निलंबित और 732 बैग जब्त
उदयपुर संभाग में कृषि विभाग ने यूरिया की कालाबाजारी पर बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए 9 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए तथा बांसवाड़ा में 732 बैग जब्त किए। तीन मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। नियंत्रित आपूर्ति और शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर किसानों के लिए हेल्पलाइन जारी की गई है।

उदयपुर संभाग में किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने बड़ी और सख्त कार्रवाई का संचालन किया है। हाल के दिनों में बढ़ती शिकायतों और बाज़ार में कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी करने की कोशिशों के बीच विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में पूरे संभाग में उर्वरक विक्रेताओं पर व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
अभियान के दौरान उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ जिलों में कुल 9 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। सबसे बड़ी कार्रवाई बांसवाड़ा में दर्ज की गई, जहां रविवार को छापेमारी के दौरान 732 बैग यूरिया मौके पर ही जब्त किए गए। तीन मामलों में पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि ऐसी गतिविधियों में लिप्त लोग न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि किसानों की आजीविका पर सीधा आघात पहुंचा रहे हैं।
अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) निरंजन सिंह राठौड़ ने बताया कि कालाबाजारी, काल्पनिक कमी और अनियमित वितरण पर नियंत्रण के लिए संभाग एवं जिला स्तर पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इन कंट्रोल रूम में प्रभारी अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिए गए हैं ताकि किसान किसी भी गड़बड़ी की तत्काल शिकायत कर सकें। इसके साथ ही सभी खाद–बीज विक्रय केन्द्रों पर कृषि पर्यवेक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जो नियमित रूप से निरीक्षण कर स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।
जिलेवार कार्रवाई भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। प्रतापगढ़ में सबसे अधिक चार, उदयपुर और बांसवाड़ा में दो-दो तथा डूंगरपुर में एक लाइसेंस निलंबित किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें और आवश्यकता के अनुरूप ही यूरिया खरीदें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि संभाग में यूरिया की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
इस बीच, कंट्रोल रूम से जुड़े अधिकारियों—उदयपुर खंड की सहायक निदेशक कृषि रेखा तिवारी, जिला उदयपुर के डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह, डूंगरपुर की गीता रावत, बांसवाड़ा के भगनार, प्रतापगढ़ के कृषि अधिकारी अरविंद कुमार मीणा तथा सलूम्बर के कृषि अधिकारी राजेंद्र कुमार मेघवाल और कपिलाल डामोर—को किसानों की समस्याओं के तत्परता से समाधान के निर्देश दिए गए हैं।
यह पूरी कार्रवाई कृषि विभाग के इस संकल्प को दोहराती है कि किसानों की जरूरतों और अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संभाग में सक्रिय निगरानी और लगातार हो रही कार्रवाई यह संदेश देती है कि यूरिया या किसी भी अन्य उर्वरक के वितरण में पारदर्शिता और उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
