कराली (सलूंबर)। युवा संन्यासी और भारतीय संस्कृति के संवाहक स्वामी विवेकानंद की जयंती के पावन अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय करावली में उत्साह और प्रेरणा का एक अनुपम संगम देखने को मिला। विद्यालय प्रांगण में आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल विवेकानंद के आदर्शों को जीवंत किया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया। कार्यक्रम की गरिमा मुख्य अतिथि विजय शंकर (संयोजक), विशिष्ट अतिथि कृष्णकांत पानेरी (पूर्व प्रधानाचार्य एवं सहसंयोजक), तुलसी राम शर्मा (सहसंयोजक, स्वदेशी जागरण मंच सलूंबर) और अध्यक्ष के रूप में उपस्थित डॉ. विजय चौधरी की उपस्थिति से और भी बढ़ गई।

समारोह का आगाज स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुआ, जिसके बाद वक्ताओं ने अपने ओजस्वी विचारों से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार किया। मुख्य अतिथि विजय शंकर ने अपने संबोधन में वर्तमान समय में आत्मनिर्भरता की प्रासंगिकता पर बल देते हुए विद्यार्थियों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों का उपयोग अनिवार्य है। विशिष्ट अतिथि कृष्णकांत पानेरी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन संघर्षों और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे एक युवा संन्यासी ने वैश्विक पटल पर भारत का मान बढ़ाया। इसी क्रम में स्वदेशी जागरण मंच के तुलसीराम शर्मा ने स्थानीय उत्पादों की महत्ता और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी साझा की।

बौद्धिक विमर्श के इस पड़ाव में विद्यालय के इतिहास व्याख्याता शेर सिंह ने भारत के सर्वांगीण विकास में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक योगदान पर एक रोचक परिचर्चा आयोजित की, जिसने विद्यार्थियों को इतिहास के अनछुए पहलुओं से परिचित कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विजय चौधरी ने 1893 के उस ऐतिहासिक शिकागो विश्व धर्म संसद का सजीव वर्णन किया, जहाँ विवेकानंद के एक संबोधन ने पूरी दुनिया को भारतीय दर्शन का मुरीद बना दिया था। कार्यक्रम को अधिक प्रतिस्पर्धी और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए विद्यार्थियों के बीच विवेकानंद की जीवनी पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें आयुषी ने प्रथम, जितेंद्र ने द्वितीय और रूचित ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। शिक्षकों की श्रेणी में इतिहास व्याख्याता शेर सिंह विजेता रहे।

अतिथियों ने सभी विजेताओं को उपहार भेंट कर प्रोत्साहित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का कुशल संचालन ख्यालि लाल लोहार द्वारा किया गया, जिन्होंने समारोह के अंत में सभी उपस्थित जनों को स्वदेशी उत्पादों को अपने दैनिक जीवन में उतारने की शपथ दिलाई। इस अवसर पर करावली ग्राम पंचायत के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में संपन्न हुआ।

Pratahkal Newsroom

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