सलूंबर: सात महीने से वेतन को तरसते नरेगा कार्मिक, क्या अब ठप होगा लसाडिया में विकास का पहिया?
सलूंबर जिले की लसाडिया पंचायत समिति में नरेगा संविदा कार्मिकों को पिछले सात महीने से मानदेय नहीं मिला है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे कार्मिकों ने विकास अधिकारी मंगू सिंह को ज्ञापन सौंपकर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। गोपाल लाल कुलमी, पंकज जैन और अन्य कार्मिकों ने जल्द भुगतान की मांग की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

सलूंबर। विकास की इबारत लिखने वाले हाथ जब खुद के निवाले के लिए मोहताज हो जाएं, तो व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना लाजमी है। राजस्थान के नवनिर्मित सलूंबर जिले की लसाडिया पंचायत समिति में इन दिनों कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है, जहां महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत कार्यरत संविदा कार्मिकों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। पिछले छह महीनों से फूटी कौड़ी न मिलने और सातवें महीने के भी आधे बीत जाने के बाद, इन कार्मिकों की आर्थिक स्थिति इस कदर जर्जर हो चुकी है कि अब उनके घरों के चूल्हे बुझने की कगार पर हैं। महज 12 से 16 हजार रुपये के अल्प मानदेय पर दिन-रात एक करने वाले इन युवाओं के लिए अब कार्यालय तक पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अपनी जायज मांगों को लेकर आक्रोशित कार्मिकों ने लसाडिया के कार्यक्रम अधिकारी (MGNREGA) एवं विकास अधिकारी मंगू सिंह को एक कड़ा ज्ञापन सौंपकर अपनी व्यथा सुनाई है। ज्ञापन में कार्मिकों ने स्पष्ट किया कि अल्प वेतनभोगी होने के बावजूद वे पूरी निष्ठा से सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतार रहे हैं, लेकिन प्रशासन की बेरुखी ने उन्हें भुखमरी की कगार पर खड़ा कर दिया है। आर्थिक तंगी का आलम यह है कि कार्मिकों को अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। मुख्यालय आने-जाने का किराया तक न जुटा पाने की बेबसी अब काम के बहिष्कार की चेतावनी में बदल चुकी है।
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्मिकों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही उनके रुके हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे संघ के आह्वान पर नरेगा सहित समस्त राजकीय कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने को मजबूर होंगे। इस गंभीर संकट के समय अपनी आवाज बुलंद करने वालों में डाटा एंट्री सहायक गोपाल लाल कुलमी, शंकर सिंह भाटी, मुकेश कुमार व्यास, चन्द्र प्रकाश मेघवाल और ग्राम रोजगार सहायक पंकज जैन सहित बड़ी संख्या में अन्य संविदा कार्मिक उपस्थित रहे। अब देखना यह है कि प्रशासन इन कर्मचारियों की इस चीख को सुनकर समय रहते सुध लेता है या फिर लसाडिया में सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप होने का इंतजार करता है। यह संकट न केवल कार्मिकों के भविष्य का है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों का भी है जिनकी आजीविका इन कार्मिकों के सुचारू कामकाज पर टिकी है।

Naresh kumar ved
नाम: नरेश कुमार वेद
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: उपखण्ड क्षेत्र, लसाड़िया (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय मुद्दे
परिचय
नरेश कुमार वेद लसाड़िया उपखण्ड क्षेत्र के स्थानीय संवाददाता हैं। वह अपने कार्यक्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं। इसमें स्थानीय जनसमस्याएं, प्रशासनिक गतिविधियां, सामाजिक घटनाक्रम और ग्रामीण अंचल के समाचार शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
नरेश कुमार वेद को मीडिया क्षेत्र में दो दशकों का लंबा अनुभव है। वह साल 2006 से 'राजस्थान पत्रिका' में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और लगातार क्षेत्र में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं पास (माध्यमिक शिक्षा) तक पूरी की है।
