सलूंबर। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी नींव घर की दहलीज और मां के सानिध्य में रखी जाती है। इसी उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए सलूंबर जिले के लसाड़िया ब्लॉक के राजकीय विद्यालयों में एक अनूठी पहल की गई है। बासुदेव कनोरिया सेवा संस्थान के वित्तीय सहयोग और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित 'मदर्स वर्कशॉप' ने आज ग्रामीण अंचल की माताओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर एक नई अलख जगाई है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बोर का पानी, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सरेडी और राजकीय प्राथमिक विद्यालय डाईखेड़ा सहित ब्लॉक के कई विद्यालयों में उमड़ी माताओं की भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सजग और तत्पर हैं।

यह कार्यशाला प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा संचालित उन 'लर्निंग कैंप' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वर्तमान में लसाड़िया ब्लॉक के 28 चयनित विद्यालयों में शिक्षा सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ब्लॉक टीम लीडर कमल नागर ने इस अभियान की गहराई पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्था और बासुदेव कनोरिया सेवा संस्थान का साझा प्रयास समुदाय और विद्यालय के बीच की दूरी को पाटना है। यह रणनीति बेहद सटीक है; लर्निंग कैंप शुरू होने से पहले और 40 दिनों के सफल संचालन के बाद माताओं को विद्यालय बुलाकर उन्हें उन शैक्षणिक गतिविधियों से रूबरू कराया जाता है, जिनसे उनके बच्चे गुजर रहे हैं। इस कार्यशाला का मुख्य दर्शन माताओं में अपने बच्चों को घर पर पढ़ाने की आदत विकसित करना और उन्हें विद्यालय की गतिविधियों में भागीदार बनाना है।

आयोजन के दौरान प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने माताओं के साथ विभिन्न रोचक और शैक्षणिक गतिविधियां साझा कीं। इन गतिविधियों का उद्देश्य माताओं के भीतर छिपे संकोच को दूर करना और उन्हें यह आत्मविश्वास दिलाना था कि वे भी अपने बच्चों की पढ़ाई में मददगार बन सकती हैं। कार्यशाला को सफल बनाने में प्रथम के CIM राधा मेघवाल, आशा कुमारी और भूपेंद्र मेघवाल ने स्थानीय शिक्षकों के सहयोग से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन प्रतिनिधियों ने माताओं को खेल-खेल में सीखने के गुर सिखाए, ताकि घर का माहौल भी एक छोटे विद्यालय के रूप में विकसित हो सके।

इस आयोजन की सार्थकता इस बात में निहित है कि यह न केवल बच्चों की शैक्षणिक क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और जागरूकता का एक नया अध्याय भी लिख रहा है। जब एक मां शिक्षित और जागरूक होती है, तो उसका प्रभाव पूरी पीढ़ी पर पड़ता है। लसाड़िया ब्लॉक के इन 28 विद्यालयों में चल रहा यह शैक्षणिक महायज्ञ आने वाले समय में जिले की साक्षरता दर और शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक बदलाव लाने के लिए तैयार है।

Pratahkal Bureau

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