सलूंबर। राजस्थान के नवनिर्मित सलूंबर जिले के लसाड़िया उपखंड क्षेत्र में सोमवार को शिक्षा का मंदिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। ग्राम पंचायत कालीभीत स्थित पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अंग्रेजी व्याख्याता सुनील कुमार के तबादले ने ऐसा तूल पकड़ा कि आक्रोशित विद्यार्थी और ग्रामीण सुबह 9 बजे ही लामबंद होकर स्कूल पहुंच गए। अपने पसंदीदा शिक्षक को खोने के डर और व्यवस्था के प्रति नाराजगी के चलते प्रदर्शनकारियों ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी। यह गतिरोध केवल कुछ घंटों का नहीं, बल्कि पूरे दिन के हाई-वोल्टेज ड्रामे में बदल गया, जिसने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कूण पुलिस थाने का जाब्ता और संदर्भ व्यक्ति (आरपी) सुरेंद्र सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे। शुरुआती दौर में समझाइश की कोशिशें की गईं, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक व्याख्याता सुनील कुमार का तबादला निरस्त करने का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। मामले को बिगड़ता देख जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) पवन कुमार रावल स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से वार्ता की और विद्यालय का ताला खोलने की अपील की, परंतु जवाब में छात्रों ने नारेबाजी और तेज कर दी। करीब तीन घंटे की लंबी और बेनतीजा बातचीत के बाद माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी को दो अलग-अलग ज्ञापन भी सौंपे गए।

दोपहर बाद विवाद को शांत करने के लिए तहसीलदार रामजीलाल गुर्जर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने ग्रामीणों और छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी शिकायतों को सुना। ग्रामीणों ने न केवल तबादले का विरोध किया, बल्कि विद्यालय स्टाफ के आचरण पर भी गंभीर आरोप लगाए। छात्रों और ग्रामीणों का सीधा आरोप कार्यवाहक प्रधानाचार्य, अन्य शिक्षकों और लिपिक पर था। जनभावनाओं और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार गुर्जर ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल एक निष्पक्ष जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। डीईओ पवन कुमार रावल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच सदस्यीय टीम का गठन किया, जिसमें दो प्रधानाचार्य, एक महिला व्याख्याता, एक संदर्भ व्यक्ति और एक अति प्रशासनिक अधिकारी को शामिल किया गया है। यह टीम मंगलवार को विद्यालय पहुंचकर सभी आरोपों की विस्तृत जांच करेगी।

हालांकि, अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। शाम चार बजे तक सहमति न बन पाने के कारण आक्रोश और नारेबाजी से माहौल काफी बिगड़ गया था। ग्रामीणों की काफी समझाइश के बाद एक बार तो स्कूल का गेट खोला गया, लेकिन जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि व्याख्याता का तबादला तुरंत निरस्त नहीं हो रहा है, कुछ असंतुष्ट छात्रों और ग्रामीणों ने दोबारा गेट पर ताला लटका दिया। इसके साथ ही ग्रामीणों ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य को हटाने के लिए एक पृथक ज्ञापन भी सौंपा, जिस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी। कालीभीत का यह घटनाक्रम न केवल एक शिक्षक के प्रति छात्रों के लगाव को दर्शाता है, बल्कि स्कूल प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच गहरी होती खाई को भी उजागर करता है।

Pratahkal Newsroom

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