सलूंबर: बेजुबानों के लिए काल बना चाइनीज मांझा, अब पकड़े जाने पर होगी पशु क्रूरता एक्ट के तहत कड़ी जेल
सलूंबर में चाइनीज मांझे के खिलाफ पशुपालन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन सचिव डॉ. समित शर्मा की नई गाइडलाइन के बाद अब प्रतिबंधित मांझा रखने वालों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत कार्रवाई होगी। संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश कुमार जैन ने बताया कि घायल पक्षियों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें अब सघन तलाशी अभियान चलाकर दोषियों को जेल भेजेंगी।

सलूंबर। मकर संक्रांति के पर्व पर आसमान में उड़ती पतंगों की खुशियां अब बेजुबान पक्षियों के लिए मातम का सबब नहीं बनेंगी। सलूंबर सहित प्रदेश भर में जानलेवा चाइनीज मांझे के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पशुपालन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी के पास प्रतिबंधित चाइनीज या धातु युक्त मांझा पाया गया, तो उसके विरुद्ध सीधे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह कदम न केवल परिंदों की जान बचाने के लिए है, बल्कि उन लापरवाह लोगों को कड़ा संदेश देने के लिए भी है जो मनोरंजन के नाम पर मौत का सामान बेच रहे हैं या उसका उपयोग कर रहे हैं।
पशुपालन विभाग, उदयपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश कुमार जैन ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि विभाग अब केवल उपचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आमजन को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाएगा। डॉ. जैन के अनुसार, मकर संक्रांति के दौरान चाइनीज मांझे की चपेट में आकर घायल होने वाले पक्षियों के त्वरित उपचार हेतु विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से विशेष चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहेंगे ताकि घायल पक्षियों को समय रहते जीवनदान मिल सके।
इस मुहिम को और अधिक धार देते हुए पशुपालन विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने नई गाइडलाइन जारी की है। शासन सचिव द्वारा जारी इन निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद बाजार में चाइनीज मांझे की उपलब्धता और उसके उपयोग से पशु-पक्षियों के घायल होने या उनकी मृत्यु होने की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। डॉ. शर्मा ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे संयुक्त रूप से सघन तलाशी अभियान चलाएं और जहां भी प्रतिबंधित मांझे का स्टॉक मिले, उसे तत्काल जब्त करें।
नई रणनीति के तहत अब केवल जब्ती ही नहीं होगी, बल्कि दोषियों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ अन्य सुसंगत कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन का यह कड़ा रुख इस बात का प्रमाण है कि इस बार परिंदों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आसमान में उड़ते बेजुबानों के पंख न कटें, इसके लिए विभाग ने प्रभावी निगरानी और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी है। प्रशासन की इस सक्रियता से यह साफ है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए यह संक्रांति भारी पड़ सकती है।

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